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आवारा कुत्तों का बढ़ता खतरा, अब जवाबदेही तय करने का वक्त सड़कों और कॉलोनियों में बढ़ते झुंड से जनसुरक्षा पर सवाल, नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

 

आवारा कुत्तों का बढ़ता खतरा, अब जवाबदेही तय करने का वक्त

सड़कों और कॉलोनियों में बढ़ते झुंड से जनसुरक्षा पर सवाल, नगर निगम की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

भोपाल, यश भारत। राजधानी भोपाल की सड़कों  गलियों और कॉलोनियों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या अब महज असुविधा नहीं, बल्कि गंभीर जनसुरक्षा का मुद्दा बनती जा रही है। शहर के कई इलाकों में कुत्तों के झुंड राहगीरों और वाहन चालकों के पीछे दौड़ते नजर आते हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी इनसे खतरा बना हुआ है। अचानक सड़क पर आ जाने वाले कुत्तों के कारण वाहन दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ रही है।

लगातार सामने आ रही घटनाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल नगर निगम और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर है। यदि आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने  नसबंदी और टीकाकरण के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है  तो उसका असर शहर की सड़कों और कॉलोनियों में दिखाई क्यों नहीं दे रहा?

जवाबदेही तय करने की जरूरत

अब यह स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि शहर में अब तक कितने आवारा कुत्तों की नसबंदी और एंटी रेबीज टीकाकरण किया गया है। खतरनाक कुत्तों के झुंड से जुड़ी शिकायतों पर कितनी कार्रवाई हुई और शिकायत मिलने के बाद मौके पर पहुंचने की निर्धारित समय सीमा क्या है? साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान और उनकी नियमित निगरानी की व्यवस्था भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।

यदि तमाम दावों और व्यवस्थाओं के बावजूद समस्या लगातार बनी हुई है  तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। अब केवल आंकड़े जारी करने से काम नहीं चलेगा। जनता को जमीन पर ठोस कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए।

नगर निगम को संवेदनशील क्षेत्रों में की गई कार्रवाई और भविष्य की कार्ययोजना सार्वजनिक करनी चाहिए  ताकि लोगों में सुरक्षा का भरोसा कायम हो सके। सवाल सिर्फ आवारा कुत्तों का नहीं  बल्कि भोपाल की जनता की जान और सुरक्षा का है।

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