मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल में अंगदान की मिसाल, सड़क दुर्घटना में ब्रेन स्टेम डेथ के बाद परिजनों ने लिया फैसला हृदय और लिवर अहमदाबाद भेजे गए
दोनों किडनियां जबलपुर में होंगी प्रत्यारोपित; अंगों को समय पर पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था

जबलपुर, यश भारत। संस्कारधानी जबलपुर में एक परिवार ने अपने प्रियजन को खोने के असहनीय दुख के बीच मानवता की ऐसी मिसाल पेश की है, जो कई लोगों को नया जीवन देने का माध्यम बनेगी। सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल 40 वर्षीय नरेंद्र कुमार रजक की ब्रेन स्टेम डेथ के बाद उनके परिजनों ने अंगदान का निर्णय लिया। बड़ेरिया मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल में उपचार के दौरान परिवार की सहमति से अंगदान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इस निर्णय से हृदय, लिवर, दोनों किडनियों सहित अन्य अंगों के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को जीवन की नई उम्मीद मिली है।
मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल में हुई महत्वपूर्ण चिकित्सा प्रक्रिया
नरेंद्र कुमार रजक गंभीर अवस्था में मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। उपचार के दौरान उनकी ब्रेन स्टेम डेथ की पुष्टि हुई। इसके बाद उनकी पत्नी और परिवार के सदस्यों ने अंगदान की सहमति दी। अस्पताल में अंगों को सुरक्षित निकालने, निर्धारित अस्पतालों तक पहुंचाने और प्रत्यारोपण की व्यवस्था से जुड़ी चिकित्सा प्रक्रिया पूरी की गई। इस पूरी प्रक्रिया में मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल की चिकित्सा टीम की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल के किडनी प्रत्यारोपण सर्जन डॉ. राजेश पटेल ने बताया कि परिजनों की सहमति मिलने के बाद अंगदान की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। हृदय और लिवर को अहमदाबाद भेजने की व्यवस्था की गई, जबकि दोनों किडनियों का प्रत्यारोपण जबलपुर में ही किया जाना है। इनमें से एक किडनी मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल और दूसरी नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में प्रत्यारोपित की जाएगी।
हृदय और लिवर अहमदाबाद, किडनियां जबलपुर में
अंग प्रत्यारोपण में समय की अहम भूमिका होती है। अंगों को सुरक्षित स्थिति में निर्धारित अस्पताल तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। डॉ. पटेल के अनुसार, अंगों को गंतव्य तक पहुंचाने और प्रत्यारोपण की आवश्यक तैयारियों में समन्वय जरूरी है। उन्होंने बताया कि अंगों को भेजने की प्रक्रिया में सामान्यतः छह से आठ घंटे तक का समय लग सकता है। हृदय और लिवर को अहमदाबाद पहुंचाने तथा किडनियों को जबलपुर के अस्पतालों तक ले जाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर की व्यवस्था की गई। इसके तहत यातायात को नियंत्रित कर अंगों को निर्धारित स्थान तक जल्द पहुंचाने की तैयारी की गई, ताकि समय की कमी के कारण प्रत्यारोपण की प्रक्रिया प्रभावित न हो।
भाई को खोने के दुख के बीच लिया अंगदान का निर्णय
नरेंद्र कुमार रजक के भाई शिवकुमार रजक ने बताया कि उनके बड़े भाई की सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद मृत्यु हो गई। वह पिछले दो-तीन दिनों से ब्रेन डेड की स्थिति में थे। परिवार ने उनकी स्थिति को देखते हुए अंगदान करने का निर्णय लिया, ताकि उनके अंगों से दूसरे लोगों को जीवन मिल सके। शिवकुमार रजक के अनुसार, नरेंद्र कुमार रजक जबलपुर के धन्वंतरि नगर क्षेत्र में रहते थे और एचसीएल कंपनी में कार्यरत थे। परिवार के लिए यह बेहद कठिन समय था, लेकिन इस दुख के बीच उन्होंने अंगदान के माध्यम से दूसरों की जिंदगी बचाने का संकल्प लिया।
एक निर्णय, कई परिवारों के लिए उम्मीद
अंगदान का यह निर्णय बताता है कि किसी व्यक्ति के जाने के बाद भी उसके अंग दूसरे लोगों के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। नरेंद्र कुमार रजक के परिजनों की सहमति और मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल की चिकित्सा टीम के प्रयासों से अंगदान की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया। यह पहल समाज में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ उन परिवारों के लिए भी प्रेरणा है, जो किसी अपने को खोने के बाद दूसरों की जिंदगी बचाने का अवसर तलाशते हैं।







