कम उम्र के रिश्ते बदल रहे POCSO केस में, हाई कोर्ट ने जागरूकता पर जताई चिंता
18 साल से कम उम्र में सहमति का भी सीमित कानूनी महत्व, किशोरों और अभिभावकों तक कानून की जानकारी पहुंचाने पर जोर

(रिपोर्टर, आकाश पाण्डेय )…जबलपुर, यश भारत । किशोरावस्था में दोस्ती और आपसी आकर्षण कई बार परिवार और समाज के विवाद के बाद गंभीर कानूनी मामले का रूप ले लेते हैं। खासकर जब लड़की की उम्र 18 साल से कम हो, तब सहमति से बने संबंध भी POCSO कानून के दायरे में आ सकते हैं। ऐसे मामलों में आरोपी की उम्र भी कई बार किशोरावस्था या उसके आसपास होती है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने इसी स्थिति को लेकर POCSO कानून की जानकारी और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर चिंता जताई है।
हाई कोर्ट के सामने रखे गए मामले में बताया गया कि कई मामलों में पीड़िताओं की उम्र 16 से 18 साल के बीच और आरोपियों की उम्र 19 से 22 साल के बीच है। कोर्ट ने POCSO से जुड़े लंबित मामलों के आंकड़ों पर भी गौर किया। प्रदेश की तीनों हाई कोर्ट खंडपीठों से जुड़े करीब 14,531 आपराधिक अपीलों के लंबित होने का उल्लेख सुनवाई के दौरान किया गया।
कानून की जानकारी नहीं होना बन रहा चुनौती
अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता ने वर्ष 2024 में डब्ल्यूपी नंबर 24633/2024 के जरिए जनहित याचिका दायर कर POCSO एक्ट की धारा 43 के प्रभावी पालन और व्यापक जागरूकता की मांग की थी। उनका कहना है कि किशोरों के साथ-साथ माता-पिता और समाज के अन्य वर्गों को भी कानून की उम्र संबंधी सीमा और प्रावधानों की जानकारी होना जरूरी है। याचिका में किशोर उम्र के आपसी आकर्षण, सोशल मीडिया के जरिए बढ़ते संपर्क और ऐसे रिश्तों के बाद पैदा होने वाली कानूनी परिस्थितियों का मुद्दा उठाया गया। कई मामलों में किशोर घर छोड़कर चले जाते हैं और परिवार की शिकायत के बाद मामला POCSO तक पहुंच जाता है।
सरकार ने बताए जागरूकता अभियान
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से विभिन्न स्तरों पर चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। राज्य स्तर पर करीब 52 हजार, जिला स्तर पर करीब 2 लाख 73 हजार और एक एनजीओ के माध्यम से करीब 4 लाख 50 हजार लोगों तक जागरूकता गतिविधियों की पहुंच बताई गई। इसके बावजूद ऐसे मामले सामने आने पर कोर्ट ने जागरूकता के प्रभाव और उसकी पहुंच को लेकर आगे निगरानी की जरूरत महसूस की।
अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता बने न्याय मित्र
हाई कोर्ट ने अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता को मामले में न्याय मित्र नियुक्त किया है। उनकी याचिका को मुख्य स्वप्रेरणा मामले के साथ जोड़ा गया है। चिन्मय मिश्रा की याचिका को भी इसी प्रक्रिया में शामिल किया गया है। मुख्य मामला डब्ल्यूपी नंबर 39997/2024 है, जो POCSO कानून के प्रभावी पालन से संबंधित है।
समिति नंबर 30 करेगी निगरानी
हाई कोर्ट ने समिति नंबर 30 को POCSO कानून के प्रभावी पालन की निगरानी की जिम्मेदारी दी है। समिति संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देने और व्यवस्था की समीक्षा करने में भूमिका निभाएगी। रजिस्ट्रार को मामला समिति की आगामी बैठक में रखने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक की कार्रवाई समय-समय पर हाई कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद होगी।
क्या कहता है कानून?
POCSO कानून के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चे को बालक माना जाता है। ऐसे मामलों में नाबालिग की सहमति होने का दावा भी POCSO के तहत आपराधिक दायित्व को स्वतः समाप्त नहीं करता। इसी वजह से किशोरों और उनके अभिभावकों के लिए कानून की उम्र संबंधी सीमा और प्रावधानों की जानकारी महत्वपूर्ण है।







