बोर्ड परीक्षा से पहले होंगे प्रैक्टिकल, 1 जनवरी से शुरू होगी प्रक्रिया; 16 फरवरी से लिखित परीक्षाएं
सामान्य स्कूलों में 13 फरवरी तक होंगे प्रायोगिक, परियोजना और आंतरिक मूल्यांकन

जबलपुर, यश भारत। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने वर्ष 2027 की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। बोर्ड ने जहां 10वीं और 12वीं की लिखित परीक्षाओं की समय-सारणी जारी कर दी है, वहीं परीक्षा से पहले प्रायोगिक परीक्षाएं, परियोजना कार्य और आंतरिक मूल्यांकन भी कराए जाएंगे। सामान्य शैक्षणिक सत्र वाले स्कूलों में यह प्रक्रिया 1 जनवरी से 13 फरवरी 2027 तक चलेगी। इसके बाद 16 फरवरी से दोनों कक्षाओं की लिखित बोर्ड परीक्षाएं शुरू होंगी। सीबीएसई के अनुसार, शीतकालीन क्षेत्रों के स्कूलों के लिए प्रायोगिक परीक्षाओं और आंतरिक मूल्यांकन का कार्यक्रम अलग रखा गया है। ऐसे स्कूलों में यह प्रक्रिया 9 नवंबर से 19 दिसंबर 2026 तक पूरी कराई जाएगी। वहीं सामान्य शैक्षणिक सत्र वाले स्कूलों को 1 जनवरी से 13 फरवरी तक का समय दिया गया है। इस दौरान विद्यार्थियों के प्रायोगिक विषयों की परीक्षा, परियोजना कार्य और आंतरिक मूल्यांकन पूरा किया जाएगा।
101 दिन पहले जारी की लिखित परीक्षा की समय-सारणी
सीबीएसई ने 6 नवंबर को 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की डेटशीट जारी की है। खास बात यह है कि बोर्ड ने परीक्षा शुरू होने से 101 दिन पहले ही कार्यक्रम घोषित कर दिया है। दोनों कक्षाओं की लिखित परीक्षाएं 16 फरवरी 2027 से शुरू होंगी। कक्षा 10वीं में 83 और कक्षा 12वीं में 121 विषयों की परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। सभी परीक्षाएं सुबह 10:30 बजे से शुरू होंगी।
46 लाख से अधिक विद्यार्थी होंगे शामिल**
बोर्ड के मुताबिक, वर्ष 2027 की परीक्षा के लिए कक्षा 10वीं के 26.5 लाख से अधिक और कक्षा 12वीं के 19.8 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया है। इस तरह दोनों कक्षाओं में कुल 46 लाख से अधिक विद्यार्थी परीक्षा में शामिल होंगे।
विषयों के बीच रखा गया पर्याप्त अंतराल**
सीबीएसई ने डेटशीट तैयार करते समय विद्यार्थियों के विषय संयोजन और प्रवेश परीक्षाओं के संभावित कार्यक्रम को ध्यान में रखा है। 40 हजार से अधिक विषय संयोजनों का विश्लेषण कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि विद्यार्थियों के दो विषयों की परीक्षाएं एक ही दिन न पड़ें। बोर्ड का उद्देश्य विद्यार्थियों को तैयारी के लिए पर्याप्त समय देना और परीक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित रखना है।







