चांद छुपा बादल में, करवाचौथ पर आसमान निहारती रहीं जबलपुर की सुहागिनें, चंद्र दर्शन की राह में मौसम बना बाधा
पति की लंबी उम्र की कामना के साथ महिलाओं को चांद निकलने का रहा इंतजार

चांद छुपा बादल में, करवाचौथ पर आसमान निहारती रहीं जबलपुर की सुहागिनें, चंद्र दर्शन की राह में मौसम बना बाधा
पति की लंबी उम्र की कामना के साथ महिलाओं को चांद निकलने का रहा इंतजार
जबलपुर, यश भारत। करवाचौथ की रात, हाथों में पूजा की थाली, चेहरे पर चांद देखने की उम्मीद और निगाहें आसमान पर… लेकिन चंद्रमा बादलों की ओट में छिपा रहा। पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ दिनभर निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं का इंतजार उस समय बढ़ गया, जब चंद्रोदय का निर्धारित समय बीतने के बाद भी चांद के दर्शन नहीं हो सके। मौसम के बदले मिजाज ने करवाचौथ की खुशियों के बीच इंतजार के पल लंबे कर दिए। ऐसे में मशहूर गीत की पंक्ति ‘चांद छुपा बादल में’ जबलपुर की करवाचौथ की रात पर सटीक बैठती नजर आई।
पूजा की थाली तैयार, बस चांद का इंतजार
करवाचौथ पर महिलाओं के लिए चंद्र दर्शन का विशेष महत्व होता है। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को सोलह शृंगार कर पूजा की जाती है। इसके बाद चांद को अर्घ्य देकर पति के हाथों जल ग्रहण करने के साथ व्रत खोलने की परंपरा है। लेकिन जब आसमान में बादल छाए रहें, तो चंद्र दर्शन की राह मुश्किल हो जाती है। जबलपुर में भी महिलाओं की निगाहें आसमान पर टिकी रहीं और चांद के निकलने की उम्मीद के साथ इंतजार बढ़ता गया।
मौसम ने बिगाड़ा चंद्र दर्शन का गणित
मौसम में आए बदलाव और आसमान में बादलों की मौजूदगी ने चंद्रमा की दृश्यता को प्रभावित किया। मौसम संबंधी पूर्वानुमानों में पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई गई थी। ऐसे में बादलों के कारण चंद्र दर्शन में परेशानी की स्थिति बनी। हालांकि, चांद दिखाई देने का समय और उसकी दृश्यता स्थानीय मौसम पर निर्भर करती है।
करवाचौथ की रात याद आया ‘चांद छुपा बादल में’
करवाचौथ पर चांद सिर्फ आसमान में चमकने वाला चंद्रमा नहीं, बल्कि दिनभर के व्रत के समापन और पति-पत्नी के रिश्ते से जुड़ी परंपरा का अहम हिस्सा है। यही वजह है कि चंद्र दर्शन में देरी होने पर महिलाओं की उत्सुकता और बढ़ जाती है। जबलपुर में भी बादलों के बीच चांद का इंतजार इस रात का खास नजारा बन गया। आसमान साफ होने और चंद्र दर्शन की उम्मीद के बीच करवाचौथ की रात ने सचमुच उस गीत की याद दिला दी—’चांद छुपा बादल में’।







