कैसी कही – फितरती फाइलों में कैद मंत्री की कार्रवाई

कैसी कही – फितरती
फाइलों में कैद मंत्री की कार्रवाई
प्रदेश के एक मलाईदार विभाग में घोटाले की चर्चा तो खूब है, लेकिन जांच का हाल वैसा ही है जैसे किसी पुरानी फाइल पर जमी धूल। मंत्री ने सख्ती दिखाते हुए जांच के आदेश दे दिए, पर मंत्रालय के अफसरों ने शायद इसे भी विचाराधीन मानकर फाइलों में सुला दिया। मंत्री पूछते रहे कि जांच कहां तक पहुंची, और अधिकारी जवाब ढूंढते रहे कि बात कैसे टाली जाए। इस बीच कुछ अधिकारियों के तबादले भी हो गए, जिससे मामला और रोचक हो गया—अब जिनसे पूछना था वे कहीं और जा चुके हैं और जो बचे हैं वे चुप्पी साधे बैठे हैं। अंदरखाने की खबर तो यह भी है कि मंत्री की कार्रवाई वाली फाइलें भी आराम फरमा रही हैं। कुल मिलाकर घोटाले की जांच कम और फाइलों की सैर ज्यादा हो रही है। अब देखना यह है कि सच बाहर आता है या फिर सरकारी अलमारियों में ही स्थायी निवास बना लेता है।
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बंगले की तलाश में अफसर
प्रदेश में आईएएस अधिकारियों के तबादले तो बड़े जोश से कर दिए गए, लेकिन उनके रहने का इंतजाम शायद बाद में याद आया। भोपाल में नए-नए आए अफसरों ने कुर्सी तो संभाल ली, पर सिर पर छत का मामला अटक गया। वजह यह कि जो अधिकारी बाहर जा चुके हैं, उन्होंने बंगले से मोह नहीं छोड़ा। सरकारी बंगला भी आखिर दिल का मामला है—छोड़ते किसे अच्छा लगता है! चार इमली क्षेत्र में बंगले पद और कद के हिसाब से मिलते हैं, पर फिलहाल कई अफसर किराए के मकान में “अस्थायी प्रशासन” चला रहे हैं। एक अधिकारी तो अपनी पसंद का बंगला भी चुन चुके हैं, लेकिन वह खाली होने का नाम नहीं ले रहा। नतीजा यह कि अफसर साहब की निगाह फाइलों से ज्यादा उस बंगले पर लगी है। प्रशासनिक फैसलों से ज्यादा चर्चा अब इस बात की है कि आखिर किस दिन कोई बंगला खाली होगा।
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चमाट वाला सहायक चाहिए
राजधानी की एक महिला अधिकारी इन दिनों प्रशासनिक फैसलों से ज्यादा अपनी सोशल मीडिया पोस्ट के कारण चर्चा में हैं। उन्होंने बड़ी ईमानदारी से अपनी जरूरत जाहिर की—उन्हें ऐसा सहायक चाहिए जो उनके कहने पर किसी को भी चमाट लगा सके। पोस्ट वायरल होते ही लोगों की कल्पनाशक्ति दौडऩे लगी कि आखिर किसे यह विशेष सेवा मिलने वाली है। वरिष्ठ अधिकारियों तक भी खबर पहुंची, मगर उन्होंने इसे व्यक्तिगत विचार बताकर कूटनीतिक चुप्पी साध ली। अब दफ्तरों में चर्चा यह है कि अगर ऐसा सहायक मिल भी गया तो पहले वह यह सोचेगा कि चमाट लगाए या अपनी नौकरी बचाए। सूत्र बताते हैं कि मैडम किसी अधिकारी से नाराज हैं, इसलिए यह गुस्सा सोशल मीडिया पर छलक पड़ा। फिलहाल लोग यही सोच रहे हैं कि सरकारी दफ्तरों में अब नोटशीट के साथ चमाट सेवा भी शुरू होने वाली है क्या।
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अपने चहेते अफसरों की सेटिंग
आईपीएस अधिकारियों की हालिया सूची ने कई अफसरों की किस्मत बदल दी—कुछ को जिले की कप्तानी मिल गई तो कुछ सीधे लूप लाइन की शरण में पहुंच गए। दिलचस्प बात यह है कि सूची महीनों पहले तैयार हो चुकी थी, लेकिन असली काम था चहेते अधिकारियों को मनपसंद जगह पर सेट करना। इसलिए सूची भी उतनी ही सावधानी से पकाई गई जितनी धीमी आंच पर खिचड़ी। अब खबर है कि एक और सूची बन रही है, जिससे उम्मीदें फिर जाग गई हैं। जिन अफसरों को पसंद की पोस्टिंग चाहिए, वे पूरी ताकत से कोशिशों में जुटे हैं कोई मंत्री जी के दरवाजे पर दस्तक दे रहा है तो कोई वरिष्ठ अधिकारियों को मनाने में लगा है। कुल मिलाकर प्रशासनिक फेरबदल कम और पसंद-नापसंद का गणित ज्यादा नजर आ रहा है। अब देखना यह है कि अगली सूची में किसका सितारा चमकेगा और कौन दफ्तर की कुर्सी से ही संतोष करेगा।
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