कटनी में टारगेट से अधिक तेन्दूपत्ता की तुड़ाई, 36 हजार 686 मानक बोरा संग्रहण, 42 हजार श्रमिकों को 14 करोड़ का होना है भुगतान

कटनी, यशभारत। कटनी जिले में तेन्दूपत्ता तुड़ाई का कार्य पूर्ण हो ेगया है। खास बात यह है कि तेन्दूपत्ता तुड़ाई के लिए वन विभाग को जो टारगेट मिला था, उससे कहीं अधिक तुड़ाई और संग्रहण किया गया है। जानकारी के मुताबिक इस वर्ष 27 समितियों के माध्यम से तेंदूपत्ता संग्रहण का काम किया गया और करीब 42 हजार लोगों को रोजगार से जोड़ा गया। बताया जाता है कि राज्य सरकार द्वारा संग्राहकों को 4 हजार रूपए प्रति मानक बोरा के माध्यम से मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है।
वन मंडल अधिकारी गर्वित गंगवार ने बताया कि कटनी जिले में 7 मई से वन उपज समितियों के माध्यम से तेंदूपत्ता की तुड़ाई की गई। राज्य सरकार की ओर से कटनी जिले के लिए 36 हजार 500 मानक बोरा तेन्दूपत्ता संग्रहण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विपरीत 36 हजार 686 मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण किया गया है, जो कि लक्ष्य का करीब 101 प्रतिशत है। डीएफओ ने बताया कि कटनी वन मंडल के अंतर्गत बहोरीबंद, ढीमरखेड़ा, बड़वारा, विजयराघवगढ़, रीठी वन परिक्षेत्र में तेन्दूपत्ता संग्रहण का कार्य 27 समितियों के माध्यम से किया गया। इन 27 समितियों को 20 समूहों में विभाजित किया गया था। करीब 42 हजार ग्रामीणों ने तेन्दूपत्ता संग्रहण का कार्य किया। इन 20 लॉट में से 19 लॉट के तेन्दूपत्ता की बोली लग चुकी है।
14 करोड़ 67 लाख का भुगतान
डीएफओ गर्वित गंगवार ने बताया कि तेन्दूपत्ता संग्रहण कार्य में लगे श्रमिकों को राज्य सरकार के निर्देशानुसार 4 हजार रूपए प्रति मानक बोरा की दर से मजदूरी का भुगतान किया जाएगा। इस बार कटनी जिले में 36 हजार 686 मानक बोरा तेन्दूपत्ता का संग्रहण किया गया है, इस हिसाब से मजदूरों को 14 करोड़ 67 लाख 74 हजार 360 रूपए की राशि का भुगतान किया जाएगा।
आदिवासियों और वनवासियों को अतिरिक्त आय
तेन्दूपत्ता संग्रहण से आदिवासियों और वनवासियों को आजीविका और अतिरिक्त आय प्राप्त होती है। इन्हें पारिश्रमिक के रूप में 4 हजार प्रति मानक बोरा दिया जा रहा है। मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा तेंदूपत्ता उत्पादक राज्य है, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 33.1 प्रतिशत हिस्सा उत्पादित करता है। इस प्रक्रिया में हजारों की तादात में संग्राहक जुड़े हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में आदिवासी और महिला संग्राहक शामिल हैं। यह कार्य मुख्य रूप से गर्मियों में मई से जून के बीच चलता है।
4000 प्रति मानक बोरा मजदूरी
तेंदूपत्ता तुड़ाई एवं संग्रहण आदिवासी और ग्रामीण परिवारों की आजीविका का एक प्रमुख साधन है। ग्रामीण आदिवासी जंगलों से पत्तियां तोड़ते हैं और 50-50 पत्तों के छोटे बंडल बनाते हैं। इन्हें सुखाकर फड़ संग्रहण केंद्रों पर जमा किया जाता है। तेंदूपत्ता को हरा सोना भी माना जाता है। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026 में तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए संग्रहण दर लगभग 4000 प्रति मानक बोरा निर्धारित की गई है। इस राशि का भुगतान सीधे संग्राहक के खाते में किया जाता है।
इनका कहना है
जिले में 36 हजार 686 मानक बोरा तेंदूपत्ता का संग्रहण हो चुका है। इस साल 27 समितियां इस काम में जुटी रहीं। जिसमे 42 हजार श्रमिकों ने तेन्दूपत्ता का संग्रहण किया।
-गर्वित गंगवार, डीएफओ







