‘टैंक भारतीय सीमाओं की आयरन वॉल’ : राजनाथ सिंह
टी-सीरीज़ टैंक ओवरहॉल परियोजना का वीएफजे में भूमिपूजन, जबलपुर की रक्षा उत्पादन क्षमता को मिलेगा विस्तार

जबलपुर, यश भारत। व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (वीएफजे) में टी-सीरीज़ टैंकों के ओवरहॉल की नई सामरिक सुविधा की आधारशिला गुरुवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रखी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित रक्षा उत्पादन क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने टैंकों की सामरिक महत्ता रेखांकित करते हुए कहा कि टैंक भारतीय सीमाओं की ‘आयरन वॉल’ हैं। आधुनिक मिसाइलों और अन्य अत्याधुनिक हथियारों के दौर में भी टैंकों की भूमिका कम नहीं हुई है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि जब युद्ध होता है तो हर तरह के हथियारों की आवश्यकता होती है। आधुनिक तकनीक और मिसाइलों का महत्व अपनी जगह है, लेकिन युद्ध के मैदान में टैंकों की भूमिका आज भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि देश की सैन्य जरूरतों के अनुरूप टैंकों की आवश्यकता की पूर्ति की जा रही है और टी-सीरीज़ टैंक ओवरहॉल परियोजना इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
80 टैंकों की सालाना ओवरहॉल क्षमता
एवीएनएल की इकाई वीएफजे में स्थापित होने वाली नई सुविधा में प्रतिवर्ष 80 टी-सीरीज़ टैंकों के ओवरहॉल की क्षमता विकसित की जाएगी। एवीएनएल को टी-सीरीज़ टैंकों के ओवरहॉल का 25 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वीएफजे की प्रस्तावित क्षमता को हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री (एचवीएफ) में पहले से उपलब्ध 150 टैंकों की वार्षिक ओवरहॉल क्षमता से जोड़ने पर कुल 230 टैंकों के सालाना ओवरहॉल की क्षमता उपलब्ध होगी।
परियोजना के तहत सिविल अधोसंरचना, विशेषीकृत संयंत्र एवं मशीनरी, टेस्ट ट्रैक तथा एलपीआर खमरिया की मौजूदा रेंज में प्रूफ बट का निर्माण एवं स्थापना शामिल है। इससे टी-सीरीज़ टैंकों के ओवरहॉल, परीक्षण और पुनर्सज्जा की क्षमता को आधुनिक स्वरूप मिलेगा।
जबलपुर बनेगा रक्षा उत्पादन की मजबूत कड़ी
रक्षा मंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा आवश्यकताओं को देखते हुए रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। टी-सीरीज़ टैंक ओवरहॉल परियोजना इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे भारतीय सेना की परिचालन जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और रक्षा उपकरणों के रखरखाव एवं उपलब्धता की क्षमता भी मजबूत होगी।
एमएसएमई को मिलेंगे नए अवसर
परियोजना से जबलपुर और महाकौशल क्षेत्र के एमएसएमई के लिए भी बड़े अवसर खुलने की संभावना है। टैंकों में बड़ी संख्या में कंपोनेंट, असेंबली और सब-सिस्टम का उपयोग होता है। इनके लिए स्थानीय सप्लाई चेन विकसित होने से छोटे एवं मध्यम उद्योग रक्षा उत्पादन की मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे। इससे स्थानीय विनिर्माण, रोजगार और सहायक उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
आत्मनिर्भर भारत को गति
वीएफजे में टी-सीरीज़ टैंक ओवरहॉल की यह सामरिक सुविधा भारतीय रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को गति देगी। जबलपुर पहले से ही देश के महत्वपूर्ण रक्षा उत्पादन केंद्रों में शामिल है और नई परियोजना से उसकी भूमिका और विस्तृत होगी।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, लोकसभा सांसद जबलपुर आशीष दुबे, रक्षा उत्पादन विभाग के सचिव संजीव कुमार, संयुक्त सचिव (भूमि प्रणाली) डॉ. गरिमा भगत, एवीएनएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सत्यव्रत मुखर्जी, निदेशक/वित्त राजीव कुमार शर्मा, निदेशक/मानव संसाधन एस.एम. साल्वे तथा वीएफजे के मुख्य महाप्रबंधक प्रवीण कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।







