आखिरी चेतावनी’ या टकराव की तैयारी? ट्रंप की 10 शर्तों पर अड़ा अमेरिका, ईरान भी सख्त रुख में
होर्मुज बना सबसे बड़ा मुद्दा

वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बार फिर कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें तेज हो गई हैं। दोनों देश दूसरे दौर की शांति वार्ता के लिए तैयार हो गए हैं, हालांकि बैठक की तारीख और स्थान अभी तय नहीं हुआ है। चर्चा है कि यह वार्ता इस्लामाबाद में हो सकती है। इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सामने 10 कड़ी शर्तें रखी हैं और इसे “आखिरी मौका” बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर इस बार भी समझौता नहीं हुआ, तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
अमेरिका की 10 बड़ी शर्तें:
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु और सैन्य ढांचे में बड़े बदलाव करे। इसमें अंतरराष्ट्रीय निगरानी की अनुमति, 440 किलो संवर्धित यूरेनियम सौंपना, मिसाइल कार्यक्रम पर नियंत्रण और प्रॉक्सी संगठनों जैसे हिज्बुल्लाह, हमास और हूती से दूरी बनाना शामिल है। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय मार्ग मानने और अपने नियंत्रण से हटाने की भी मांग की गई है। इसके अलावा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) को खत्म करने और अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करने की शर्त भी शामिल है।
ईरान की पलटवार शर्तें:
दूसरी ओर ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह बिना शर्त झुकने को तैयार नहीं है। उसने मांग की है कि उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाए जाएं, फ्रीज की गई संपत्तियां वापस की जाएं और भविष्य में हमले न करने की लिखित गारंटी दी जाए। ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि वह सीमित समय के लिए परमाणु कार्यक्रम रोक सकता है और संवर्धित यूरेनियम को रूस को सौंपने पर विचार कर सकता है। इस प्रस्ताव को व्लादिमीर पुतिन का समर्थन भी मिला है, लेकिन अमेरिका इस विकल्प से सहमत नहीं दिख रहा।
होर्मुज बना सबसे बड़ा मुद्दा:
रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के बीच सबसे ज्यादा तनाव है। ईरान ने संकेत दिया है कि अगर उसकी शर्तें नहीं मानी गईं, तो वह इस मार्ग को बंद कर सकता है, जिससे खाड़ी देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है। कुल मिलाकर, दोनों देशों के बीच बातचीत की राह खुली जरूर है, लेकिन शर्तों और रणनीतिक हितों की टकराहट के कारण समझौता आसान नहीं दिख रहा। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह कूटनीति शांति लाएगी या टकराव और बढ़ेगा।







