भगोड़ा गिरोह खुलेआम कहता है – “प्रशासन मेरी जेब में है!”
खनिज माफिया बेखौफ: मैहर से कटनी तक खुलेआम प्रशासन को चुनौती!

खनिज माफिया बेखौफ: मैहर से कटनी तक खुलेआम प्रशासन को चुनौती!
भगोड़ा गिरोह खुलेआम कहता है – “प्रशासन मेरी जेब में है!”

कटनी, यशभारत। मैहर जिले के भटूरा क्षेत्र से भगोड़ा खनिज माफिया अब कटनी जिले की सीमाओं में खुलेआम अवैध उत्खनन कर रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन और खनिज विभाग की उदासीनता ने माफिया को इतना हौसला दे दिया है कि वे सीधे कह रहे हैं – “प्रशासन मेरी जेब में है।”
वन विभाग ने पहले दो मशीनें और एक ट्रैक्टर जब्त किए थे, जो भदनपुर पहाड़ वन चौकी में खड़े हैं। लेकिन उसके बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी ढिलाई का फायदा उठाकर माफिया अब जिले की सीमाओं में सक्रिय हो गया है और भारी पैमाने पर अवैध उत्खनन कर रहा है।
◆ प्रशासन और खनिज विभाग की खामोशी पर सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिले में खनिज विभाग और प्रशासन लगातार शिकायतों के बावजूद केवल खानापूर्ति कर रहे हैं। जब्त मशीनों पर ही कार्रवाई सीमित रहती है, जबकि असली गिरोह कटनी और मैहर की सीमाओं में सक्रिय होकर पर्यावरण और शासन व्यवस्था दोनों के लिए खतरा बन गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह माफिया खुलेआम धमकाता है और कहता है
– “प्रशासन मेरी जेब में है, हमें रोकने वाला कोई नहीं।”
■ स्थानीय लोगों की नाराजगी और मांग
ग्रामीणों और क्षेत्रीय व्यवसायियों का कहना है कि अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो अवैध खनन पूरे जिले में फैल जाएगा।
वे प्रशासन और खनिज विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी केवल नोटिस और खानापूर्ति ही होती है।
■ कार्रवाई की कमी का भयंकर असर
मैहर से कटनी तक सक्रिय भगोड़ा माफिया
■ जब्त मशीनों और ट्रैक्टरों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं
■खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन की उदासीनता
ग्रामीण और वन संपदा खतरे में
माफिया सार्वजनिक तौर पर कहता है – “प्रशासन मेरी जेब में है।”
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति न केवल पर्यावरणीय खतरे को बढ़ा रही है, बल्कि प्रशासन की विश्वसनीयता और खनिज नियंत्रण प्रणाली की पोल भी खोल रही है।
■सवाल अभी भी जिंदा
क्या कटनी और मैहर के खनिज विभाग की ढिलाई के खिलाफ राज्य सरकार कोई ठोस कदम उठाएगी?
क्या भगोड़ा माफिया को रोकने के लिए अब कार्रवाई समय रहते की जाएगी?
क्या वन संपदा और कृषि भूमि को माफिया के हाथों बर्बाद होने से बचाया जा सकेगा?
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर प्रशासन ने तुरंत कदम नहीं उठाए, तो अवैध खनन पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो जाएगा।







