कटनी

खुलेआम घूम रहे जानलेवा हमले के आरोपी, रीठी थाना क्षेत्र के ग्राम अमगवां का मामला, किसान ने एसपी से लगाई न्याय की गुहार, कहा : रीठी पुलिस ने साधारण धाराओं में दर्ज किया मामला

कटनी, यशभारत। कानून व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ाता हुआ एक संवेदनशील मामला सामने आया है। रीठी थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम अमगवां हंगामा का एक अपाहिज किसान न्याय की भीख मांगने के लिए पिछले दो महीनों से रीठी थाने और एसपी कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर है। शारीरिक रूप से अक्षम किसान अपाहिज होने के कारण दूसरों के कंधों पर सवार होकर पुलिस अफसरों के दरवाजे तक पहुंचा लेकिन रीठी पुलिस की कुंभकर्णी नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है। पीडि़त किसान एक बार फिर न्याय की आस लेकर एसपी कार्यालय पहुंचा। वहां उसने एसपी के समक्ष अपनी आपबीती सुनाते हुए स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। पीडि़त का कहना है कि जान से मारने की नीयत से उस पर और उसके पूरे परिवार पर कुल्हाड़ी तथा लोहे की रॉड से हमला करने वाले 14 नामजद आरोपी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि रीठी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
शिकायतकर्ता किसान रामकिशोर निवासी ग्राम अमगवां ने एसपी को शिकायत में बताया कि विगत 8 अप्रैल की रात लगभग 10.30 बजे वह अपने घर पर परिवार के साथ था। इसी दौरान पुरानी रंजिश के तहत गांव के ही 14 रसूखदार दबंग लाठी, डंडे, लोहे की रॉड और कुल्हाड़ी जैसे जानलेवा हथियारों से लैस होकर उसके घर में जबरन घुस आए। हमलावरों में मिल्लूलाल उर्फ बंधा, शंकर कुशवाहा, राघवेंद्र, सुखलाल बर्मन, राहुल वंशकार, धर्मेन्द्र, एकलव्य, शनि, लक्ष्मीकांत, सुकल, वर्षा, कमलेश बाई, बल्लू और तेजीलाल शामिल थे। घटना के करीब दो महीने बीत जाने के बाद भी पीडि़त परिवार को न्याय की जगह सिर्फ कोरा आश्वासन मिल रहा है। रामकिशोर का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद रीठी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी लेकिन पुलिस ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। पुलिस ने न तो आरोपियों के खिलाफ उचित और कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और न ही उनकी गिरफ्तारी के लिए कोई ठोस कदम उठाया।
पीडि़त रामकिशोर की जुबानी
दबंगों ने मुझे और मेरे परिवार को लगभग मार ही डाला था। मेरी बेटियों के हाथ टूट गए हैं। रीठी पुलिस हमारी कोई सुनवाई नहीं कर रही है। आरोपी आज भी गांव में खुलेआम घूम रहे हैं और केस वापस न लेने पर हमें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। हम अपने ही घर में खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं। रीठी पुलिस की हीलाहवाली और कार्यप्रणाली से निराश होकर अपनी जान की सुरक्षा की खातिर पीड़ित रामकिशोर को मजबूरन अपने बेटे के कंधे पर बैठकर एसपी कार्यालय आना पड़ा। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाते हुए मांग की है कि
इस पूरे मामले की किसी निष्पक्ष अधिकारी से जांच कराई जाए। आरोपियों के खिलाफ साधारण धाराओं के बजाय हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया जाए।
इनका कहना है
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ संतोष कुमार डेहरिया ने बताया कि भूमि को लेकर इनका विवाद हुआ था, जिसमें दोनों पक्षों की ओर से प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। अभी उनकी मेडिकल रिपोर्ट आनी शेष है। जैसे ही डॉक्टरों की रिपोर्ट सामने आएगी। उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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