
नई दिल्ली। संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने आवश्यकता से अधिक बल का प्रयोग किया और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ कठोर व्यवहार किया।
याचिकाकर्ता ने अदालत से मामले की स्वतंत्र जांच कराने, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने, जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान करने, कथित रूप से घायल प्रदर्शनकारियों को मुआवजा देने तथा पुलिसकर्मियों के साथ मौजूद अज्ञात व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच कराने की मांग की है।
यह जनहित याचिका प्रदर्शनकारी एवं अधिवक्ता अंशुल कुमार की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि यह मामला संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत नागरिकों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठाता है।
मंगलवार को याचिकाकर्ता ने मामले की तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया, लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया। पीठ ने मौखिक रूप से कहा कि मामले को बुधवार को सूचीबद्ध किया जाएगा। अब इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई होने की संभावना है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि संसद मार्च के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज, प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाने, हिरासत में लेने और बल प्रयोग जैसे कदम उठाए, जबकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण बताया गया है। मामले में अदालत की सुनवाई के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।







