भोपाल

चुनाव कानून साफ है, 45 दिन के भीतर परिणाम पर आपत्ति और 10 दिन के भीतर मतदाता सूची पर सवाल, फिर कांग्रेस क्यों बहाने बना रही है_ सारंग

चुनाव कानून साफ है, 45 दिन के भीतर परिणाम पर आपत्ति और 10 दिन के भीतर मतदाता सूची पर सवाल, फिर कांग्रेस क्यों बहाने बना रही है_ सारंग

यश भारत भोपाल। मध्यप्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग ने मंगलवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पत्रकार-वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि चाहे राहुल गांधी हों या उमंग सिंघार, कांग्रेस के नेता आंकड़ों और तथ्यों के बिना निराधार आरोपों से देश को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव के 20 महीने बाद कांग्रेस की कुंभकर्णी नींद क्यों टूट रही है। आजाद भारत में वोटों की पहली चोरी तो जवाहरलाल नेहरू ने खुद प्रधानमंत्री बनने के लिए की थी। उन्होंने सवाल किया कि यदि कांग्रेस को मतदाता सूचियों में गड़बड़ी की आशंका थी, तो उसने समय सीमा के अंदर निर्वाचन आयोग से इसकी शिकायत क्यों नहीं की? कानून के अनुसार चुनाव परिणाम की घोषणा के 45 दिन के भीतर और चुनाव घोषित होने के बाद भी नामांकन की अंतिम तारीख से 10 दिन पहले तक शिकायत या चुनौती दी जा सकती है, तब कांग्रेस कहां थी? चुनाव पर आपत्ति इलेक्शन पिटिशन से ही की जा सकती है, न कि पत्रकार वार्ता करने से। संविधान की झूठी दुहाई देने वाली कांग्रेस न संवैधानिक व्यवस्थाओं का पालन करती है और न ही संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करती है। मतदाता सूची से जुड़ी हर आपत्ति या सुधार का स्पष्ट कानूनी प्रावधान है। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के तहत हर नागरिक और राजनैतिक दल को सूची में गड़बडी दिखने पर आपत्ति दर्ज कर सकते हैं। चुनाव आयोग हर वर्ष मतदाता सूची का पुनरीक्षण करता है। झूठे आरोप लगाने वाली कांग्रेस और उसके नेता मध्यप्रदेश की जनता को बताएं कब-कब की मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायत की।

राहुल गांधी की झूठ और फरेब की राजनीति में अपना सुर मिला रहे कांग्रेस नेता

प्रदेश शासन के मंत्री सारंग ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पत्रकार-वार्ता के माध्यम से राहुल गांधी की झूठ और फरेब की राजनीति में अपना सुर मिलाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति में कुंभकर्ण हुए हैं, जो 6 महीने सोते थे। लेकिन कांग्रेस के नेता तो उनसे भी आगे निकल गए हैं। मध्यप्रदेश में 20 महीने पहले जनता ने हमें सरकार बनाने के लिए जनादेश दिया था और हमारी सरकार बने लगभग 625 दिन हो चुके हैं। कांग्रेस को अब 20 महीनों बाद क्यों याद आ रहा है कि वोटों में गड़बड़ी हुई या चुनाव आयोग ने वोटों की हेराफेरी कर दी? उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता ने हमें 163 सीटों पर बहुमत दिया था। कांग्रेस के नेता जिन 27 सीटों पर गड़बड़ी की बात कह रहे हैं, अगर उन्हें इसमें से घटा भी दिया जाए, तब भी भारतीय जनता पार्टी को 136 सीटें मिलती, जो सरकार बनाने के लिए पर्याप्त होती हैं।

बाबा साहब को चुनाव हराने कांग्रेस ने की थी वोटों की चोरी

प्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस जब-जब देश में सत्ता में रही, उसने संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया और जब वह विपक्ष में है, तो संवैधानिक संस्थाओं पर प्रश्नचिह्न लगाने का काम कर रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी जिस वोट चोरी की बात कर रहे हैं, अगर इतिहास देखा जाए तो देश में पहली वोट चोरी का आरोप तो उनके पूर्वज पं. जवाहरलाल नेहरू पर है। प्रधानमंत्री के चुनाव में उन्हें सिर्फ एक वोट मिला था और उनसे ज्यादा वोट सरदार पटेल को मिले थे। इसके बावजूद पं. नेहरू देश के प्रधानमंत्री बन गए। संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर को किस तरह की हथकंडेबाजी से चुनाव हराने का षडयंत्र किया गया था, यह पूरा देश जानता है। उसके बाद भी कांग्रेस जब-जब चुनाव हारी है, वो कभी ईवीएम, कभी चुनाव आयोग और कभी मतदाता सूची में गड़बड़ी को दोष देती रही है। उन्होंने कहा कि जिस नेता के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी 90 चुनाव हारी हो, उसकी मानसिकता का अंदाज लगाया जा सकता है।

न्यायालय के सामने क्यों नहीं रखे तथ्य?

प्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि जिन बाबा साहब को कांग्रेस पार्टी ने षडयंत्रपूर्वक चुनाव हराने के प्रयास किए, उन्हीं के बनाए संविधान में चुनाव से जुड़े विवादों के निराकरण के लिए स्पष्ट प्रावधान हैं। संविधान के अनुच्छेद 329 बी और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 80 और 81 में यह स्पष्ट प्रावधान है कि यदि किसी व्यक्ति को चुनाव परिणामों को लेकर कोई आपत्ति है, तो वह चुनाव परिणाम आने के 45 दिन के अंदर हाईकोर्ट में उसके निराकरण के लिए याचिका लगा सकता है। 1973 के चरनलाल साहू वर्सेस नंदकिशोर भट्ट वाले प्रकरण, 1999 के वेंकटचलम वर्सेस ए स्वामी कल्याण स्वामी कैन प्रकरण और 2001 के हरिशंकर जैन वर्सेस सोनिया गांधी प्रकरण में हाईकोर्ट इस प्रावधान की स्पष्ट रूप से व्याख्या कर चुका है। ऐसे में अगर कांग्रेस पार्टी या उसके नेताओं को विधानसभा चुनावों को लेकर कोई आपत्ति या शिकायत थी, तो उन्हें न्यायालय जाकर सभी तथ्य माननीय न्यायालय के समक्ष रखना चाहिए था। उन्होंने समयसीमा के अंदर सभी तथ्य न्यायालय के समक्ष क्यों नहीं रखे? अब इतने दिनों बाद उन्हें कैसे अचानक महसूस हो रहा है कि कोई गड़बड़ी हुई है? श्री सारंग ने कहा कि असल में कांग्रेस की ये सारी कवायद बिहार विधानसभा चुनाव में सुनिश्चित हार को देखते हुए फेस सेविंग की कोशिश है और अगर अभी ये चुनाव नहीं होते, तो कांग्रेस अभी भी चुप बैठी रहती।

मतदान से 10 दिन पहले तक शिकायत सुनता है चुनाव आयोग

प्रदेश शासन के मंत्री श्री विश्वास सारंग ने कहा कि कांग्रेस ने मध्यप्रदेश की मतदाता सूची को लेकर भी सवाल उठाए हैं। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 कहता है कि हर नागरिक और हर राजनीतिक दल मतदाता सूची की गड़बड़ी पर समय रहते आपत्ति दर्ज करा सकता है। चुनाव आयोग तो इस मामले में बहुत लिबरत है। वह मतदान के दस दिन पहले तक मतदाता सूची से संबंधित गड़बड़ियों की शिकायत सुनता है और एंटरटेन करता है। मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेस पार्टी के अन्य नेता बताएं कि जिन 27 विधानसभा सीटों को लेकर आप झूठ-फरेब की राजनीति कर रहे हैं, उन सीटों को लेकर चुनाव आयोग में कितनी बार शिकायत की है। आयोग में शिकायत की कोई रिसीप्ट है कांग्रेस और उसके नेताओं के पास। अगर 27 सीटों पर मतदाता सूची में कोई गड़बड़ी थी तो नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार जरूर बताएं कि इसको लेकर कोई आपत्ति चुनाव आयोग में दर्ज कराई है। कांग्रेस और नेता प्रतिपक्ष ने उक्त 27 विधानसभा सीटों को लेकर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई। हर चुनाव से पहले चुनाव आयोग फार्म 6,7,8 के जरिए आपत्ति प्राप्त कर उन पर सुधार करता है। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा का भी चुनाव संपन्न हो गया।

जनता को गुमराह करने झूठे आरोप लगा रही कांग्रेस

मध्यप्रदेश शासन के मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि चुनाव आयोग मतदाता सूची में आपत्ति दर्ज कराने भरपूर समय देता है, लेकिन तब कांग्रेस पार्टी कोई शिकायत नहीं करती, चुनाव हारने के बाद पूरा दोष ईवीएम और चुनाव आयोग पर मढ़ देती है। कांग्रेस की यह रणनीति जनता को गुमराह करने के लिए है। कांग्रेस पार्टी को बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के चुनाव से लेकर वर्ष 2024 के चुनाव तक हर चुनाव में बेइमानी करने की आदत बन गई है। कुछ दिनों पहले इस मुद्दे पर कर्नाटक के एक मंत्री ने स्वयं यह बात मानी थी कि कांग्रेस के शासनकाल में वोटर लिस्ट में गड़बड़ी हुई तो कांग्रेस पार्टी की सरकार ने उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया है। यह स्वीकारोक्ति कांग्रेस पार्टी की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर कुठाराघात को भी दर्शाता है। कांग्रेस हर समय झूठ बोलकर लोगों को गुमराह करना और जब अपनी कलई खुलने वाली हो तो भाग जाने की राजनीति पर काम कर रही है। कांग्रेस को सुर्खियां बटोरने, हेडलाइन में आने के लिए इस तरह के मिथ्या आरोप लगाने से बचना चाहिए और संवैधानिक व्यवस्था के हिसाब से अपनी शिकायत समय पर दर्ज करानी चाहिए थी।

कांग्रेस की नीति और नीयत में खोट

प्रदेश शासन के मंत्री श्री विश्वास सारंग ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी संवैधानिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को बनाए रखने के लिए कटिबद्ध है। राहुल गांधी और कांग्रेस को नीयत ठीक करनी चाहिए। राहुल गांधी नीति ठीक करिए। झूठ फरेब की राजनीति करके जनता को गुमराह न करें। देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर पूरी दुनिया भारत पर अभिमान करती है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में हमारा देश बहुत मजबूत है। बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने जो लोकतंत्र और गणतंत्र की स्थापना इस देश में की है वह आदर्श है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अपनी राजनीतिक असफलता को छिपाने के लिए पूरी दुनिया में लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम कर रही है। यदि राहुल गांधी के पास कोई तथ्य है, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के पास या कांग्रेस के किसी भी नेता के पास कोई तथ्य है तो हलफनामा के साथ उचित फोरम पर जाकर यह बात चुनाव आयोग पहुंचाएं। कांग्रेस नेता गलत आरोप लगाकर लोकतंत्र को बदनाम करने की जो कोशिश कर रहे हैं यह देश और प्रदेश की जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी।

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