जिला अस्पताल में एमआरआई मशीन अधर में, मरीजों की परेशानी जस की तस
कभी दिसंबर, कभी जनवरी और अब नई तारीख

जबलपुर, यशभारत। जिला अस्पताल विक्टोरिया में एमआरआई मशीन शुरू होने का इंतजार कर रहे मरीजों के लिए एक बार फिर निराशा हाथ लगी है। वर्षों से जिस सुविधा का दावा किया जा रहा है, वह आज भी कागजों और फाइलों तक ही सीमित है। मशीन लगाने की जगह तैयार है, तकनीक अस्पताल परिसर में मौजूद है, लेकिन जरूरी विद्युत लोड की व्यवस्था न होने से एमआरआई अब तक चालू नहीं हो सकी है।
यह पहला मौका नहीं है जब यह मामला अधर में लटका हो। पिछले वर्ष भी एमआरआई मशीन को लेकर यही स्थिति बनी थी—जगह चिन्हित की गई, औपचारिकताएं पूरी हुईं, लेकिन बुनियादी तैयारी के अभाव में योजना ठंडे बस्ते में चली गई। अब एक बार फिर वही कहानी दोहराई जा रही है।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि एमआरआई के लिए आवश्यक 180 किलोवॉट विद्युत लोड की स्वीकृति के बिना ही इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया क्यों आगे बढ़ाई गई?
सिविल सर्जन डॉ. नवीन कोठारी का कहना है कि विद्युत लोड की व्यवस्था कंपनी की जिम्मेदारी है, लेकिन आमजन यह जानना चाहता है कि जब यह स्पष्ट था कि लोड उपलब्ध नहीं है, तो उद्घाटन और शुरुआत की संभावित तारीखें क्यों तय की गईं। प्रबंधन की ओर से हर बार “जल्द शुरू होगी” का वही आश्वासन दिया जा रहा है कभी दिसंबर, कभी जनवरी और अब नई तारीख।
इस लापरवाही की कीमत मरीज चुका रहे हैं। आज भी जिला अस्पताल के मरीजों को एमआरआई के लिए नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज या महंगे निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ता है। रांझी, मानेगांव, अधारताल जैसे क्षेत्रों से आने वाले गरीब मरीजों के लिए यह अतिरिक्त खर्च और मानसिक-शारीरिक पीड़ा का कारण बन रहा है।
गौरतलब है कि यशभारत द्वारा इस मामले को पूर्व में भी प्रमुखता से उठाया गया, बावजूद इसके संबंधित अधिकारी अब तक अपनी नींद से जागते नजर नहीं आ रहे हैं।
सवाल अब भी कायम हैं—क्या जिला अस्पताल की एमआरआई सुविधा सिर्फ फाइलों में ही चलेगी, और इस प्रशासनिक लापरवाही की जवाबदेही आखिर कौन लेगा?







