रक्षाबंधन पर भारत में अदृश्य रहेगा आंशिक चंद्र ग्रहण, सूतक मान्य नहीं; सुबह 7:33 से 9:48 तक राखी बाँधने का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त

रक्षाबंधन पर भारत में अदृश्य रहेगा आंशिक चंद्र ग्रहण, सूतक मान्य नहीं; सुबह 7:33 से 9:48 तक राखी बाँधने का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त
भोपाल, यश भारत। श्रावण पूर्णिमा एवं रक्षाबंधन के अवसर पर 28 अगस्त 2026 को लगने वाला आंशिक चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। भारत में ग्रहण अदृश्य रहने के कारण शास्त्रीय नियमानुसार सूतक काल लागू नहीं होगा और रक्षाबंधन का त्योहार किसी भी ग्रहण प्रभाव से मुक्त रहेगा।
राजा भोज ज्योतिष पीठ के अध्यक्ष डॉ. विनीत तिवारी ने बताया कि इस वर्ष 28 अगस्त शुक्रवार को श्रावण शुक्ल पूर्णिमा है। भारतीय मानक समय अनुसार आंशिक ग्रहण सुबह 8:04 बजे से 11:21 बजे तक रहेगा, लेकिन इस दौरान भारत में चंद्रमा क्षितिज के नीचे रहने के कारण यह दिखाई नहीं देगा। धर्मशास्त्र के सुस्थापित सिद्धांत यत्र दृश्यम् तत्र फलम् के अनुसार, जहाँ ग्रहण दिखाई नहीं देता वहाँ सूतक और उससे जुड़े निषेध मान्य नहीं होते। अतः सभी मंदिर खुले रहेंगे और पूजा-पाठ व मांगलिक कार्य निर्बाध रूप से संपन्न होंगे।
भद्रा रहित रहेगा सुबह का समय
डॉ. तिवारी ने स्पष्ट किया कि भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। पूर्णिमा तिथि सुबह 9:48 बजे तक रहेगी। बहनें बिना किसी संकोच के निर्धारित शुभ मुहूर्त में राखी बाँध सकती हैं।
राखी बाँधने के शुभ मुहूर्त
सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: सुबह 7:33 बजे से 9:48 बजे तक (लाभ व अमृत चौघड़िया में, पूर्णिमा तिथि रहते)।
सुबह का अन्य समय: सुबह 5:57 बजे से 7:33 बजे तक।
पूर्णिमा पश्चात (उदय तिथि अनुसार): सुबह 10:45 बजे तक (अमृत चौघड़िया) एवं दोपहर 12:22 बजे से 1:58 बजे तक (शुभ चौघड़िया)।
ज्योतिषाचार्य ने अपील की है कि लोग धार्मिक भ्रांतियों से दूर रहकर पारिवारिक स्नेह और सौहार्द के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाएँ।







