एमपी विधानसभा का विशेष सत्र: नारी शक्ति वंदनपर सत्ता-विपक्ष में घमासान

एमपी विधानसभा का विशेष सत्र: नारी शक्ति वंदनपर सत्ता-विपक्ष में घमासान
आरक्षण के क्रियान्वयन को लेकर रार
भोपाल, यशभारत। मध्य प्रदेश विधानसभा का विशेष सत्र सोमवार को पूरी तरह से नारी शक्ति वंदन के मुद्दे पर केंद्रित रहा। सत्र के दौरान सरकार ने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के संकल्प के साथ आगे बढ़ने की घोषणा की, तो वहीं कांग्रेस ने परिसीमन की शर्त को लेकर सरकार को घेरा और इसे महिलाओं के साथ छलावा बताया।

सदन की कार्यवाही की शुरुआत में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में दिवंगतों को श्रद्धांजलि दी गई। सदन ने सुप्रसिद्ध पार्श्व गायिका आशा भोंसले, पूर्व केंद्रीय मंत्री कप उन्नीकृष्णन, मोहसिना किदवई, अबू हाशिम खान चौधरी और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री बिरेन सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किया। इन दिवंगतों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखा गया और कार्यवाही को आधा घंटे के लिए स्थगित भी किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समत्व भवन में भाजपा विधायक दल की बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आधी आबादी को अधिकार दिलाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। वहीं, सदन में सरकार ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने आजादी के बाद से महिलाओं के साथ केवल अन्याय किया है और अब आरक्षण में भी अड़ंगे डाल रही है। मंत्री विश्वास कैलाश सारंग और प्रतिमा बागरी ने कांग्रेस को महिला-विरोधी करार देते हुए कहा कि विपक्ष ने बिल को रोकने का काम किया है, जिसके लिए उन्हें प्रदेश की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए।

दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के निवास पर हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में पार्टी ने रणनीति तैयार की। कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में ही संसद से पारित हो चुका था, जिसे सरकार लागू नहीं कर रही है। कांग्रेस की मांग है कि परिसीमन का बहाना बनाने के बजाय मौजूदा सीटों पर ही 33 प्रतिशत आरक्षण तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। इसके साथ ही, कांग्रेस ने महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण में ओबीसी आरक्षण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि हम आरक्षण के समर्थन में हैं, लेकिन परिसीमन की आड़ में इसे लटकाने के खिलाफ हैं। इधर, भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने कहा कि आज का दिन महिलाओं के नाम है और हम उनके अधिकारों के लिए पूरी मजबूती से लड़ेंगे।
विधानसभा के इस विशेष सत्र को लेकर दोनों प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। एक तरफ सरकार इसे ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस इसे आगामी चुनावों से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है। सदन में अब संकल्प पारित करने और तीखी बहस के दौर की संभावना बनी हुई है।






