नजरें झुकाओ, कुर्सी छोड़ो… जीएमसी में सीनियर्स के 32 नियमों पर बढ़ा बवाल, डीन से जवाब तलब

नजरें झुकाओ, कुर्सी छोड़ो… जीएमसी में सीनियर्स के 32 नियमों पर बढ़ा बवाल, डीन से जवाब तलब
भोपाल, यशभारत। गांधी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस प्रथम वर्ष में दाखिला लेने वाले नए छात्रों के लिए सीनियर्स द्वारा तय की गई बंदिशों की फेहरिस्त अब कॉलेज प्रशासन के लिए गले की फांस बन गई है। सीनियर्स द्वारा बनाए गए कथित 32 नियमों और फरमानों के खिलाफ उठी आवाज राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की एंटी रैगिंग सेल तक पहुंच चुकी है। आयोग की तल्खी के बाद कॉलेज के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
इंसानियत और गरिमा पर चोट करते 32 फरमान
कॉलेज के माहौल को दोस्ताना बनाने के बजाय सीनियर्स द्वारा जारी इस अनधिकृत कोड ऑफ कंडक्ट में जूनियर्स के हर कदम पर पाबंदी लगा दी गई थी। शिकायत के मुताबिक, इन नियमों में सीनियर्स के सामने नजरें झुकाकर रखना, उनके बैठे होने पर खड़े रहना, सीनियर्स की क्लास के दौरान उनके आसपास न भटकना जैसी बुनियादी बातें शामिल हैं। इतना ही नहीं, कैंपस की जिन सुविधाओं पर सभी छात्रों का समान हक है जैसे लाइब्रेरी, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और जेडीए कैंटीन वहां भी जूनियर्स की आवाजाही पर अघोषित बैन लगा दिया गया था।
24 घंटे का अल्टीमेटम, 12 सवालों से घिरे डीन
मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए एनएमसी की एंटी रैगिंग सेल ने जीएमसी डीन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आयोग ने 24 घंटे की समयसीमा तय करते हुए 12 प्रमुख बिंदुओं पर रिपोर्ट तलब की है। आयोग ने सीधे तौर पर पूछा है कि:
कैंपस में यह ‘समानांतर व्यवस्था’ और नियम किसके इशारे पर बनाए गए?
क्या इन नियमों को जूनियर्स पर मानसिक दबाव बनाकर लागू करवाया जा रहा था?
सीनियर्स और जूनियर्स के बीच कथित तौर पर हुए ‘इंटरैक्शन’ के वक्त कॉलेज प्रशासन या फैकल्टी की निगरानी कहां थी?
रैगिंग के शिकंजे में फंसेगा जीएमसी प्रशासन?
एनएमसी की इस सख्त कार्रवाई में सबसे अहम पहलू यह है कि आयोग ने कॉलेज प्रशासन से ही यह स्पष्ट करने को कहा है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो क्या इस पूरे घटनाक्रम को आधिकारिक तौर पर रैगिंग माना जाए? अगर आयोग इन 32 पाबंदियों को रैगिंग की परिधि में मानता है, तो न केवल नियम बनाने वाले सीनियर्स पर निलंबन और एफआईआर की गाज गिर सकती है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही को लेकर जीएमसी प्रबंधन की भूमिका पर भी गाज गिरना तय माना जा रहा है।







