अमलाहा में गिट्टी क्रेशर के खिलाफ फूटा किसानों का गुस्सा, रोजी-रोटी की जमीन बचाने के लिए उग्र प्रदर्शन

अमलाहा में गिट्टी क्रेशर के खिलाफ फूटा किसानों का गुस्सा, रोजी-रोटी की जमीन बचाने के लिए उग्र प्रदर्शन
इछावर,यशभारत। तहसील के ग्राम पंचायत अमलाहा में प्रस्तावित गिट्टी क्रेशर मशीन को लेकर विवाद गहरा गया है। रविवार को बड़ी संख्या में किसानों और ग्रामीणों ने एकजुट होकर अपनी पुश्तैनी जमीन बचाने के लिए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हमें न्याय दो और जमीन हमारी जान है जैसे नारों के साथ ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया कि वे किसी भी कीमत पर अपनी आजीविका छिनने नहीं देंगे।
पुश्तों से कर रहे खेती, अब बेदखली का डर
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे किसान अर्जुन सिंह ने बताया कि सर्वे क्रमांक 537/1 की यह भूमि दशकों से उनके परिवार के भरण-पोषण का एकमात्र सहारा है। अर्जुन सिंह के अनुसार, हमारे बाप-दादा इसी जमीन पर पसीना बहाते आए हैं। आज 35 से 40 परिवार इस खेती पर निर्भर हैं। अगर यहाँ क्रेशर लगा, तो हमारे बच्चों के सामने भूखे मरने की नौबत आ जाएगी।
ग्राम पंचायत के दोहरे प्रस्तावों पर उठे सवाल
इस पूरे विवाद में ग्राम पंचायत की भूमिका संदेह के घेरे में है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरपंच श्रीमती पवन कुंवर द्वारा 5 जून 2025 को गुपचुप तरीके से, बिना ग्रामीणों की सहमति के क्रेशर के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि जब विरोध बढ़ा, तो पंचायत ने 5 अगस्त 2025 को एक और प्रस्ताव पारित किया, जो किसानों के पक्ष में था। इस दूसरे प्रस्ताव में स्वीकार किया गया कि प्रभावित लोग अनुसूचित जाति वर्ग से हैं और यहाँ से नर्मदा पाइपलाइन भी गुजरी है, जिसके कारण यहाँ क्रेशर नहीं लगाया जा सकता।
दलित होने के कारण छीनी जा रही जमीन
विरोध प्रदर्शन में दलित समाज के प्रति भेदभाव का मुद्दा भी उठा। ग्रामीण गिरधारी चौहान ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, हम दलित वर्ग से हैं, शायद इसीलिए हमें निशाना बनाया जा रहा है। हमारी जमीन जबरन छीनी जा रही है, लेकिन हम झुकेंगे नहीं।” वहीं, बड़ी संख्या में उपस्थित महिलाओं ने भी हुंकार भरी कि वे अपनी आजीविका की सुरक्षा के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करेंगी।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि ग्राम पंचायत के विरोधाभासी प्रस्तावों और क्रेशर की मंजूरी की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।






