बेटी पढ़ाओ बेटी बढ़ाओ बेटियां हमारा सम्मान और गौरव लाड़ली लक्ष्मी जैसे शब्द क्या सिर्फ अक्षर मात्र रह गये

बेटी पढ़ाओ बेटी बढ़ाओ बेटियां हमारा सम्मान और गौरव लाड़ली लक्ष्मी जैसे शब्द क्या सिर्फ अक्षर मात्र रह गये
गुरुग्राम की स्टार टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की पिता के द्वारा की गई हत्या से सन्न समाज
जबलपुर यश भारत। देश की राजधानी दिल्ली से सटे गुरुग्राम में स्टार टेनिस खिलाड़ी की राधिका यादव की उसके पिता के द्वारा गोली मारकर की गई हत्या ने समाज को सन्न करके रख दिया है। एक तरफ सरकारें जहां बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ लाड़ली लक्ष्मी योजना हमारी बेटी हमारा सम्मान जैसे प्रोग्रेसिव विचारों से ओतप्रोत योजनाओं का संचालन कर रही है तो दूसरी तरफ ऑनर किलिंग और राधिका यादव की हत्या जैसे मामले सोचने पर दिवस कर रहे हैं कि क्या यह स्लोगन और योजनाएं सिर्फ एक अक्षर मात्र हैं।पिछले दिनों हुई राधिका यादव की हत्या के बाद उसके पिता ने पुलिस के सामने अपना जुर्म कबूल करते हुए यह कहा है कि उसने समाज के लोगों के तानों से परेशान होकर इस वारदात को अंजाम दिया है। लोग इस ताना मारते थे कि वह बेटी की कमाई खा रहा है। जबकि हकीकत ठीक इसके विपरीत है जानकारी के मुताबिक राधिका का पिता साधन संपन्न है और उसे बेटी की कमाई की कोई जरूरत भी नहीं थी। पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ में राधिका के पिता दीपक यादव ने जो कुलसी किए हैं वह चौंकाने और दिल दहलाने वाले है तो है ही साथ ही एक अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाशाली एथलीट के जीवन की विरासत अंत की कहानी बया करती है। पुलिस हिरासत में दीपक ने बताया कि घटना की 15 दिन पहले से वह ठीक से सोया तक नहीं था। और बेटी की कई बातों को लेकर परेशान था वह राधिका पर टेनिस अकैडमी बंद करने कहता था लेकिन राधिका इसके लिए तैयार नहीं थी। पुलिस को प्रारंभिक पड़ताल के दौरान राधिका और उसके कोच के चैट भी मिले हैं। जो राधिका की मानसिक स्थिति को उजागर करते हैं। वह घर छोडऩे का मन रखती थी जो उसके जीवन में घुटन और तनाव को दर्शाता है। वहीं दूसरी तरफ पुलिस को घटना स्थल से मिली पांच खाली कारतूस भी मिले हैं जो मामले की गंभीरता को दर्शाते है। हाला की पुलिस पूरी मामले की गंभीरता की जांच कर रही है कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितिया बनी जिसकी चलती एक पिता ने अपनी प्रतिभाशाली बेटी की हत्या कर दी। इस घटना ने समाज को झकझोर कर रख दिया है। लेकिन क्या यह पूरा सच है या घटना के पीछे कोई और राज है जो अब तक सामने नहीं आया है। जानकारी तो यहां तक लगी है कि बेटी की हत्या करने के बाद दीपक ने अपने भाई से कहा था भाई मैंने कन्या वध कर दिया है मुझे फांसी दिलाओ। यह तो हो गई दीपक यादव के कबूलनामे की बात। लेकिन घटना के बाद राधिका के दोस्तों की कुछ बयान सामने आए हैं सोशल मीडिया के जरिए जितने भी पुलिस गंभीरता से ले रही है। राधिका की एक दोस्त हिमांशिका सिंह ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर किया है जिसमें उसने लिखा है कि राधिका के पिता उसे कंट्रोल करते थे। राधिका को तस्वीर खिंचवाना वीडियो बनाना पसंद था लेकिन पिता के दबाव के कारण धीरे-धीरे उसने सब बंद कर दिया था। राधिका की आजादी उन्हें नागवार थी। राधिका अक्सर कहती थी कि उस पर परिवार की काफी बंदिसें हैं। हर चीज की सफाई देनी पड़ती है क्या कर रही हो और क्या नहीं एक-एक बात का जवाब देना पड़ता था। ऐसी और भी पोस्ट उसके दोस्तों ने शेयर किए हैं और पुलिस अब दोस्तों के बयान भी दर्ज करने की कवायद में लगी है। राधिका आईफोन इस्तेमाल करती थी जिसका पासवर्ड किसी और को नहीं मालूम था पुलिस ने इस आईफोन को संबंधित एजेंसी के हवाले कर दिया है और जैसे ही यह फोन अनलॉक होता है और कई बातें भी सामने आ सकती हैं। पिता के द्वारा बेटी की हत्या के इस मामले ने यह सोचने पर विवश कर दिया है कि क्या बेटी का आगे बढऩा इतना बड़ा अपराध है कि पिता ही उसकी हत्या कर दे और यदि ऐसा है तो फिर हम बेटियों को पढाने और और उन्हें कैरियर में आगे बढऩे की बात क्यों करते हैं। देश में ऑनर किलिंग के मामले भी समय-समय पर सामने आते रहते हैं। एक किस तरफ बेटा बेटियों के बराबर होने की बात की जाती है तो दूसरी तरफ इस तरह की घटनाएं विचलित करने वाली है। जिन बेटियों की सफलता पर परिवार व समाज को गर्व होना चाहिए वही समाज ऐसी घटनाओं में लिप्त होकर क्या संदेश देना चाहता है यह ज्वलंत सवाल बनकर खड़ा है। गुरुग्राम मेरा राधिका यादव की हत्या इस समय देश में न केवल सुर्खियां बनी हुई है बल्कि इस घटना के बाद एक नई बहस भी छिड गई है। वर्तमान दौर में जब लड़कियां खेल से लेकर सेना और अन्य क्षेत्रों में अपना परचम लहरा रही है तथा देश का सम्मान बढ़ा रही है ऐसी में इस तरह की घटनाएं सोने के लिए विवश जरूर करती है।







