जहां लगता था ‘दादा का दरबार’, वहीं हुआ अंत… कल बारामती में होगा अजित पवार का अंतिम संस्कार
बरामती- पवार परिवार का अभेद्य गढ़

जहां लगता था ‘दादा का दरबार’, वहीं हुआ अंत… कल बारामती में होगा अजित पवार का अंतिम संस्कार
-1769606985221_v.webp)
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की जिंदगी और राजनीति की सबसे बड़ी पहचान रहा बरामती शहर, बुधवार को उनकी जीवन यात्रा का आखिरी पड़ाव भी बन गया। एक विमान हादसे में उनकी मौत हो गई। जिस बरामती ने उन्हें सत्ता तक पहुंचाया, उसी जमीन पर उनका अंत होना कई लोगों के लिए बेहद भावुक और प्रतीकात्मक पल बन गया।
बरामती दशकों से पवार परिवार का गढ़ रहा है। यहीं से शरद पवार ने अपनी राजनीति की मजबूत नींव रखी और यहीं से अजीत पवार ने भी एक बड़े नेता के रूप में अपनी पहचान बनाई। इस शहर ने पवार परिवार की राजनीति को आकार दिया।अजीत पवार की पूरी राजनीतिक यात्रा बरामती से गहराई से जुड़ी रही। इसलिए उनका यहीं अंतिम सांस लेना, उनके समर्थकों और महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक गहरी विडंबना के रूप में देखा जा रहा है।
बरामती- पवार परिवार का अभेद्य गढ़
1967 से बरामती सीट पवार परिवार के पास रही। पहले शरद पवार और फिर 1991 से अजीत पवार ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। अजीत पवार ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस से की थी और 1999 में एनसीपी बनने के बाद वे उसी में शामिल हो गए।
बरामती में अजीत पवार की पहचान एक जमीनी नेता के रूप में बनी। गांव-गांव तक उनकी पकड़ और लगातार संपर्क ने उन्हें यहां मजबूत समर्थन दिलाया। सालों तक किया गया विकास कार्य उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत माना गया।
2024 का विधानसभा चुनाव बरामती के इतिहास में सबसे अहम माना गया। पहली बार ऐसा हुआ जब शरद पवार की राजनीतिक इच्छा निर्णायक साबित नहीं हुई। अजीत पवार ने अपने भतीजे युगेंद्र पवार को एक लाख से ज्यादा वोटों से हराकर बड़ी जीत दर्ज की।






