गीता जयंती पर हुआ श्रद्धा व ज्ञान का समागम

गीता जयंती पर हुआ श्रद्धा व ज्ञान का समागम
– श्रीमद् विद्येश्वरी मंदिर में हुआ भव्य गीता जयंती विमर्श कार्यक्रम
भोपाल यशभारत। राष्ट्रीय गीता जयंती के पावन अवसर पर सोमवार को श्रीमद् विद्येश्वरी मंदिर, अपूर्वा एनक्लेव अयोध्या बायपास में धर्म सुधाकर सेवा समिति एवं रामायण केंद्र भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में भव्य गीता जयंती विमर्श कार्यक्रम संपन्न हुआ। आयोजन में देशभर के कई ख्यातिलब्ध विद्वानों, धार्मिक वक्ताओं और संस्कृताचार्यों ने गीता के सिद्धांतों, धर्म, कर्म और जीवनोपयोगी संदेशों पर सारगर्भित उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार, सरस्वती वंदना और भगवान श्रीकृष्ण के समवेत स्तुति गीतों के साथ किया गया। आयोजन में उपस्थित विद्वानों ने भगवद्गीता के मूल तत्वों—स्वधर्म, निष्काम कर्म, ज्ञान, भक्ति और जीवन के उद्देश्य पर गहन चर्चा की। कार्यक्रम के संयोजक पं कमलेश जोशी ने बताया कि प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी गीता जयंती पर विशेष विमर्श का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य समाज में गीता के मूल्यों और शिक्षाओं का प्रसार करना है। मार्गदर्शक के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय कथा वाचक एवं व्याकरणाचार्य योगेंद्र शास्त्री ने कहा कि गीता केवल धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाने वाली दिव्य पुस्तक है। आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, महिलाएं, युवा और वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने गीता के श्लोकों, उनके अर्थों और जीवन में उनके प्रयोग पर विशेष रूप से चर्चा सुनी। कार्यक्रम के अंत में सभी के लिए प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन आयोजन राजीव रंजन खरे के निर्देशन में किया गया। कार्यक्रम के दौरान गीता जयंती की जय, जय श्रीकृष्ण के उद्घोष से मंदिर परिसर भक्तिभाव से गूंज उठा। सनातन धर्म के उत्साह, भक्ति और ज्ञान से परिपूर्ण यह आयोजन पूरे गरिमा और आध्यात्मिक वातावरण के साथ संपन्न हुआ।







