“मंदाकिनी का रौद्र रूप, जलमग्न चित्रकूट” : मूसलाधार बारिश ने छीनी जिंदगी भर की जमा-पूंजी, 42 साल पुराना पुल भी तेज बहाव में बहा
सतना। भारी बारिश से सतना चित्रकूट में तबाही की आहट है। करीब 14 घंटे तक हुई लगातार बारिश ने सतना के चित्रकूट की तस्वीर बदल दी। धार्मिक नगरी में मंदाकिनी ने रौद्र रूप दिखाया और नदी का पानी घाटों से निकलकर बस्तियों, बाजारों और घरों तक पहुंच गया। क्षेत्र की स्थिति यह है कि कई इलाकों में दो मंजिला मकान तक पानी में डूब गए। चारों तरफ पानी था और लोग अपने घर, सामान और जिंदगी भर की जमा-पूंजी को डूबते देखते रहे। जिसके चलते जनजीवन बुरी तरीके से प्रभावित हो गया है।

बताया जा रहा है कि भारी बारिश के चलते सबसे ज्यादा मार रामघाट, राघव प्रयाग घाट, कामता, नयागांव, आरोग्यधाम, पुरानी लंका चौराहा, बाजार क्षेत्र, खटकाना मोहल्ला, क्योतरा, रामायणी कुटी और जानकीकुंड में दिखाई दी। मंदाकिनी का पानी घरों में घुसा तो लोग जरूरी सामान लेकर छतों पर पहुंच गए।

कई परिवारों के सामने बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित रखने की चुनौती थी। नीचे घरों में पानी बढ़ता रहा और ऊपर छतों पर बैठे परिवार मदद की राह देखते रहे। स्थिति यह है कि कहीं सड़क पर नाव चलती नजर आई तो कहीं लोग अपने घरों और होटलों की छतों पर बैठकर मदद का इंतजार करते रहे।
पुल भी तेज बहाव में बह गया
बताया जा रहा है कि भारी वर्षा के चलते लगभग 42 साल पुराना, 25 फीट ऊंचा और 300 मीटर चौड़ा नदी का बड़ा पुल भी तेज बहाव में बह गया। बताया जा रहा है कि सीएम डॉक्टर यादव हालातों का जायजा लेने पहुंचने वाले हैं।

भारी बारिश में गृहस्थी उजड़ गई
बाढ़ का पानी उतरने के बाद तबाही का असली मंजर सामने आएगा। घरों में रखा राशन, कपड़े, बिस्तर, फर्नीचर और घरेलू सामान पानी में खराब हो गया। कई परिवारों के लिए यह सिर्फ जलभराव नहीं, बल्कि उनकी बरसों की मेहनत के उजड़ जाने जैसा है।
400 दुकानें बाढ़ की चपेट में आ गईं
जिन घरों में कुछ घंटे पहले तक खाना पक रहा था, वहां पानी भरा था। जिन दुकानों में रोज श्रद्धालुओं की भीड़ रहती थी, वहां सामान पानी में डूबा था। मंदाकिनी तट की करीब 400 दुकानें बाढ़ की चपेट में आ गईं।
छतों पर फंसे लोगों तक पहुंचा हेलीकॉप्टर
हालात बिगड़ने पर बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। सेना के दो हेलीकॉप्टर रेस्क्यू में लगाए गए। घरों और होटलों की छतों पर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने की कोशिश की गई। वहीं SDRF की टीम ने मोटरबोट के जरिए बाढ़ के पानी के बीच पहुंचकर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।
देर रात तक करीब 650 लोगों को रेस्क्यू कर राहत शिविरों में पहुंचाया गया। जिन लोगों ने रात छतों पर डर के बीच गुजारी, उनके लिए मोटरबोट और हेलीकॉप्टर किसी उम्मीद से कम नहीं थे।
अंधेरे में रहा पूरा इलाका
बताया जा रहा है कि बाढ़ के बीच बिजली व्यवस्था भी ठप हो गई। पूरे क्षेत्र में करीब 20 घंटे तक ब्लैकआउट रहा। चारों तरफ पानी और ऊपर से घना अंधेरा। ऐसे में छतों पर फंसे परिवारों के लिए हर गुजरता घंटा भारी पड़ता रहा।
चित्रकूट के प्रमुख तीर्थस्थल सती अनसूया, गुप्तगोदावरी और स्फटिक शिला भी बाढ़ से प्रभावित हुए। आश्रमों, मठों और मंदिरों में रखा सामान तेज बहाव में बहता नजर आया। जिस चित्रकूट में श्रद्धालु आस्था लेकर आते हैं, वहां इस बार पानी ने मंदिरों और आश्रमों की चौखट तक को अपनी चपेट में ले लिया।
क्षेत्र में डर और दर्द का आलम
भारी वर्षा के बाद जिले के नदी-नाले उफान पर होने से सतना-चित्रकूट मार्ग देर रात तक बाधित रहा। दोपहर जिला मुख्यालय से CEO जिला पंचायत शैलेन्द्र सिंह और अपर कलेक्टर विकास सिंह भी सीधे चित्रकूट नहीं पहुंच सके। उन्हें कालिंजर होकर चित्रकूट पहुंचना पड़ा।
सीएम ने बाढ़ और जलभराव की स्थिति की समीक्षा की
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार रात दिल्ली से सीधे रीवा पहुंचे। यहां सर्किट हाउस में उन्होंने रीवा और सतना जिले में बाढ़ और जलभराव की स्थिति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री चित्रकूट पहुंचकर बाढ़ प्रभावित इलाकों का जायजा लेंगे।
सतना के बिरसिंहपुर, कोटर और कोठी क्षेत्र में सेमरावल नदी उफान पर है। कई गांवों में पानी तेजी से बढ़ने के कारण लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं, जबकि कई परिवार दो मंजिला मकानों की छतों पर फंसे हुए हैं।







