मंदाकिनी के सैलाब के बीच चित्रकूट पहुंचे मुख्यमंत्री : हेलीकॉप्टर से लिया बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा

चित्रकूट, यश भारत। लगातार करीब 14 घंटे हुई मूसलाधार बारिश के बाद चित्रकूट में मंदाकिनी नदी ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि धार्मिक नगरी का बड़ा हिस्सा बाढ़ की चपेट में आ गया। नदी का पानी घाटों से निकलकर रिहायशी इलाकों, बाजारों और घरों तक पहुंच गया। कई स्थानों पर दो मंजिला मकानों तक पानी पहुंचने से लोगों को रात छतों पर गुजारनी पड़ी। बिगड़े हालात के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार सुबह चित्रकूट पहुंचे। उन्होंने हेलीकॉप्टर से मंदाकिनी के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया और राहत-बचाव कार्यों की जानकारी ली। उनके साथ विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार और रीवा संभाग के कमिश्नर शैलेंद्र सिंह भी मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति देखने के साथ प्रशासन और राहत दलों द्वारा चलाए जा रहे बचाव अभियान का जायजा लिया। इस दौरान प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और उन्हें आवश्यक राहत उपलब्ध कराने पर प्राथमिकता रही।

घाटों से बस्तियों तक पहुंचा पानी
मूसलाधार बारिश के बाद मंदाकिनी का जलस्तर तेजी से बढ़ा। रामघाट, राघव प्रयाग घाट, कामता, नयागांव, आरोग्यधाम, पुरानी लंका चौराहा, बाजार क्षेत्र, खटकाना मोहल्ला, क्योटरा, रामायणी कुटी और जानकीकुंड सहित कई इलाकों में पानी भर गया। देखते ही देखते सड़कें जलमार्ग में तब्दील हो गईं।

कई घरों और होटलों में पानी घुसने के बाद परिवारों ने जरूरी सामान लेकर छतों पर शरण ली। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षित निकालना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बन गया। कई स्थानों पर छतों से लोग राहत दलों को मदद के लिए पुकारते नजर आए।

400 से अधिक दुकानों पर संकट
मंदाकिनी किनारे संचालित करीब 400 दुकानों में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया। दुकानों में रखा सामान पानी में डूबने से व्यापारियों को भारी नुकसान की आशंका है। पानी उतरने के बाद ही वास्तविक क्षति का आकलन हो सकेगा। धार्मिक नगरी के प्रमुख बाजारों में बाढ़ के कारण कारोबार पूरी तरह प्रभावित रहा।
650 लोगों का रेस्क्यू, सेना के हेलीकॉप्टर उतरे*
हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। सेना के दो हेलीकॉप्टरों को बचाव अभियान में लगाया गया। वहीं SDRF की टीमों ने मोटरबोट के जरिए पानी से घिरे इलाकों में पहुंचकर लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।
प्रशासन के अनुसार देर रात तक करीब 650 लोगों को सुरक्षित निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया। कई घंटे तक छतों पर फंसे परिवारों के लिए राहत दलों की पहुंच बड़ी राहत बनी।
तेज बहाव में पुराना पुल भी चपेट में
मंदाकिनी के तेज बहाव ने नदी पर बने पुराने बड़े पुल को भी नुकसान पहुंचाया। करीब 42 साल पुराने इस पुल के क्षतिग्रस्त होने से आवागमन पर गंभीर असर पड़ा है। पुल के आसपास के क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। तेज बहाव के कारण प्रशासन और बचाव दलों को भी कई स्थानों पर मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
20 घंटे तक बिजली गुल, अंधेरे में रही धार्मिक नगरी
बाढ़ का असर बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा। प्रभावित क्षेत्रों में करीब 20 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। रात के समय अंधेरा होने से छतों पर फंसे लोगों की परेशानी और बढ़ गई। पानी और बिजली दोनों संकटों के बीच लोगों ने पूरी रात दहशत में गुजारी।
प्रमुख धार्मिक स्थल भी बाढ़ से प्रभावित
चित्रकूट के सती अनसूया, गुप्तगोदावरी और स्फटिक शिला क्षेत्र भी बाढ़ से प्रभावित हुए। कई आश्रमों, मठों और मंदिर परिसरों में पानी पहुंच गया। वहां रखा सामान खराब होने की जानकारी सामने आई है। सामान्य दिनों में श्रद्धालुओं से गुलजार रहने वाले इन धार्मिक स्थलों पर बाढ़ के कारण सन्नाटा पसरा रहा।
पानी उतरने के बाद सामने आएगी तबाही की पूरी तस्वीर
बाढ़ का पानी कम होने के बाद नुकसान का वास्तविक आकलन सामने आएगा। कई घरों में अनाज, कपड़े, बिस्तर, फर्नीचर और अन्य घरेलू सामान खराब हो गया है। दुकानों में रखा व्यापारिक माल भी पानी में डूब गया।
प्रभावित परिवारों के सामने अब सिर्फ घर से पानी निकालने की चुनौती नहीं है, बल्कि पूरी गृहस्थी को दोबारा खड़ा करने का संकट है। कई परिवारों की वर्षों की मेहनत से जुटाया सामान कुछ घंटों की बाढ़ में बर्बाद हो गया।
सतना-चित्रकूट मार्ग भी प्रभावित
भारी बारिश के कारण आसपास की नदियों और नालों के उफान पर आने से सतना-चित्रकूट मार्ग पर भी आवागमन प्रभावित रहा। प्रशासनिक अधिकारियों को भी चित्रकूट पहुंचने में परेशानी हुई। जिला मुख्यालय से जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह और अपर कलेक्टर विकास सिंह को चित्रकूट पहुंचने के लिए कालिंजर मार्ग का सहारा लेना पड़ा।
अब राहत के बाद पुनर्वास की चुनौती
मंदाकिनी का जलस्तर घटने के साथ तत्काल खतरा कम जरूर हुआ है, लेकिन प्रभावित परिवारों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। प्रशासन के सामने अब राहत सामग्री पहुंचाने, क्षतिग्रस्त मकानों और दुकानों का सर्वे कराने, बिजली-पानी व्यवस्था बहाल करने तथा प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने की चुनौती है।
मुख्यमंत्री के दौरे के बाद अब लोगों की नजर सरकार की ओर से मिलने वाली राहत और नुकसान की भरपाई पर है। चित्रकूट में आई इस बाढ़ ने एक बार फिर मंदाकिनी के किनारे बसे इलाकों की सुरक्षा और स्थायी बाढ़ प्रबंधन की जरूरत को सामने ला दिया है।







