कैसी कही – फितरती – नए साहब का गुस्सा, बाबू का पसीना

कैसी कही – फितरती – नए साहब का गुस्सा, बाबू का पसीना
भोपाल, यशभारत।
नए साहब का गुस्सा, बाबू का पसीना
मंत्रालय में इन दिनों नए साहबों की एंट्री ने पुराने बाबुओं की धडक़न बढ़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि फाइल से ज्यादा अब बाबू साहब के मूड को संभालने में लगे हैं। पिछले दिनों एक बाबू की हालत तब पतली हो गई जब वह चाय के साथ फाइल लाना भूल गया। बस फिर क्या था, साहब का पारा सीधे सातवें आसमान पर पहुंच गया। बंद कमरे में बाबू की ऐसी क्लास लगी कि बाहर तक उसकी गूंज सुनाई दी। बेचारे बाबू पसीना पोंछते हुए कमरे से बाहर निकले और दौड़ते हुए फाइल लेकर पहुंचे। मगर तब तक मंत्रालय के गलियारों में किस्से-कहानियां शुरू हो चुकी थीं। कोई कह रहा था कि फाइल नहीं, तो साहब का स्माइल नहीं, तो कोई बाबू को सलाह दे रहा था कि अब से चाय से पहले फाइल ही पेश करो। मंत्रालय के माहौल में फिलहाल एक ही मंत्र चल रहा है साहब खुश तो सब खुश।
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एक विभाग में दो साहब, कर्मचारी कन्फ्यूज
मंत्रालय के एक विभाग में इन दिनों कर्मचारियों की सबसे बड़ी समस्या फाइल नहीं, बल्कि साहब पहचानो प्रतियोगिता बन गई है। वजह यह है कि विभाग में एक नहीं, दो-दो बड़े अफसर तैनात हो गए हैं। पहले से मौजूद साहब अपनी कुर्सी पर जमे हुए हैं, वहीं हाल ही में जिले से आईं महिला अधिकारी भी उसी स्तर पर पदस्थ हो गई हैं। अब कर्मचारियों की हालत ऐसी है कि फाइल लेकर निकलते समय उन्हें समझ नहीं आता कि किसके दरबार में पेश हों। कहीं गलत साहब के पास चले गए तो डांट का खतरा अलग। अंदरखाने की चर्चा है कि नई अधिकारी को फिलहाल काम समझने का समय दिया जा रहा है। लेकिन कर्मचारियों के लिए यह सीखने का दौर किसी पहेली से कम नहीं है। फिलहाल मंत्रालय के गलियारों में यही सवाल गूंज रहा है— आखिर असली साहब कौन?
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गर्मी में मंत्री जी का प्याज मंत्र
प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी से लोग बेहाल हैं और सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लेकिन एक कद्दावर मंत्री जी ने गर्मी से बचने का ऐसा अनोखा नुस्खा दे दिया कि वह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया। मंच पर बोलते-बोलते मंत्री जी ने अपने कुर्ते की जेब से एक प्याज निकाल ली और उसे गर्मी से बचाव का रामबाण उपाय बता दिया। पास खड़े एक बुजुर्ग भी तुरंत प्रेरित हो गए और उन्होंने भी अपनी जेब से प्याज निकालकर दिखा दी। यह दृश्य देखकर खुद मंत्री जी भी मंच पर ही खिलखिला पड़े। हालांकि भीषण गर्मी से परेशान लोगों को यह प्याज समाधान कुछ खास रास नहीं आया। लोगों का कहना है कि गर्मी की मार तो झेल ही रहे हैं, ऊपर से यह प्याज वाला मंत्र भी कम परेशान नहीं कर रहा।
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निगम-मंडलों की कुर्सी पर नेताओं की नजर
प्रदेश की राजनीति में इन दिनों निगम-मंडलों की नियुक्तियों की हलचल तेज हो गई है। कुर्सियों की आहट सुनते ही कई नेता अचानक सक्रिय हो गए हैं। जो नेता लंबे समय से लूप लाइन में पड़े थे, वे अब फिर से राजनीतिक मैदान में नजर आने लगे हैं। कोई सीधे मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहा है तो कोई संगठन के दरवाजे खटखटा रहा है। हर कोई अपनी-अपनी जुगाड़ जमाने में जुटा हुआ है। अंदरखाने की चर्चाएं भी खूब चल रही हैं कौन किसके करीब है, किसकी सिफारिश भारी पड़ेगी और किसे आखिरकार कुर्सी नसीब होगी। फिलहाल नेताओं के बीच उम्मीदों का पारा काफी ऊंचा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में किस नेता की किस्मत चमकती है और किसे फिर इंतजार की कतार में खड़ा रहना पड़ता है।







