
वॉशिंगटन। अमेरिका ने अपने व्यापार कानून की चर्चित धारा ‘सेक्शन 301’ के तहत भारत समेत 53 देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) द्वारा जारी रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि ये देश जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात पर प्रभावी रोक लगाने में विफल रहे हैं। प्रस्तावित कदम के तहत संबंधित देशों से आने वाले उत्पादों पर 12.5 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है।
भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच आया प्रस्ताव
यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) को अंतिम रूप देने के लिए उच्चस्तरीय वार्ताएं जारी हैं। सूत्रों के अनुसार, भारत इस वार्ता में सेक्शन 301 की कार्रवाई से राहत और प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम टैरिफ सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दे रहा है।
USTR की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
USTR की 60 निष्कर्षों (Findings) वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन देशों ने जबरन श्रम से बने सामानों के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया है या उसे प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया है, उनके खिलाफ अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है। ऐसे देशों के लिए 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं, जिन देशों ने इस दिशा में आंशिक या प्रभावी कदम उठाए हैं अथवा अमेरिका के साथ संबंधित व्यापारिक समझौते किए हैं, उनके लिए 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव है।
भारत ने आरोपों को किया खारिज
भारत ने USTR के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि ऐसे मुद्दों का समाधान एकतरफा कार्रवाई के बजाय चल रही व्यापारिक वार्ताओं के माध्यम से किया जाना चाहिए। भारत का मानना है कि इन मामलों को बातचीत के जरिए सुलझाना दोनों देशों के हित में होगा।
क्या है ‘सेक्शन 301’?
सेक्शन 301, अमेरिकी ट्रेड एक्ट 1974 का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है। इसके तहत USTR को यह अधिकार प्राप्त है कि वह किसी देश की व्यापारिक नीतियों, नियमों और प्रथाओं की जांच करे तथा यह निर्धारित करे कि वे अमेरिकी व्यापार के लिए अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं या नहीं | यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो अमेरिका संबंधित देश के उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगा सकता है।
नए टैरिफ अभी तुरंत लागू नहीं होंगे
USTR ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित शुल्क तत्काल प्रभाव से लागू नहीं किए जाएंगे। पहले इस पर सार्वजनिक टिप्पणियां आमंत्रित की जाएंगी। 6 जुलाई तक सुझाव और आपत्तियां जमा कराई जा सकेंगी, जबकि 7 जुलाई से सार्वजनिक सुनवाई शुरू होने की संभावना है।
अमेरिकी प्रशासन का सख्त रुख
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा कि जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने में विफलता स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना है कि इससे अमेरिकी श्रमिकों को वैश्विक बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। उन्होंने संकेत दिए कि समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद नए टैरिफ जल्द लागू किए जा सकते हैं।
भारत पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तावित टैरिफ लागू होते हैं तो भारतीय निर्यातकों की लागत बढ़ सकती है और अमेरिका को होने वाले कुछ निर्यात प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय सार्वजनिक समीक्षा और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के नतीजों पर निर्भर करेगा।







