आज बैकुंठ चतुर्दशी कल कार्तिक पूर्णिमा,नर्मदा तटों पर उमड़ेगी भीड़
पंचकोशी परिक्रमा की तैयारियां पूर्ण

जबलपुर यश भारत। धार्मिक आस्था और श्रद्धा से परिपूर्ण कार्तिक मास का समापन अपने चरम पर है। आज बैकुंठ चतुर्दशी और कल कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर शहर सहित पूरे नर्मदा अंचल में भक्ति का अनुपम माहौल व्याप्त है। नर्मदा तटों, सरोवरों और मंदिरों में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ने लगा है।
बैकुंठ चतुर्दशी का महत्व
हिंदू परंपरा में बैकुंठ चतुर्दशी का अत्यंत धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की पूजा करने से भक्त को बैकुंठ (मोक्ष) की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि इस दिन त्रिपुरासुर वध के बाद भगवान शिव ने भगवान विष्णु को बैकुंठ धाम का वरदान दिया था।भक्तजन इस दिन गंगा या नर्मदा स्नान, दीपदान, तुलसी पूजन, और शिव-विष्णु की संयुक्त आराधना कर पुण्यलाभ प्राप्त करते हैं। जबलपुर के ग्वारीघाट, तिलवारा, भेड़ाघाट, सिद्धघाट, सरस्वती घाट और लम्हेटाघाट सहित प्रमुख नर्मदा तटों पर श्रद्धालु सुबह से ही स्नान और पूजन-अर्चन के लिए पहुंचने लगेगे।
कल कार्तिक पूर्णिमा
कल बुधवार 5 नवम्बर को कार्तिक पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन देव दीपावली का उत्सव मनाया जाता है। इस दिन देवता स्वयं धरती पर अवतरित होकर स्नान और दीपदान का फल प्रदान करते हैं।
नर्मदा, गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती जैसे पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। जबलपुर में इस अवसर पर हजारों श्रद्धालु नर्मदा स्नान, दीपदान, दान-पुण्य और रात्रि जागरण करेंगे।

नर्मदा तटों पर विशेष तैयारियां
नर्मदा किनारे के सभी प्रमुख घाटों भेड़ाघाट, तिलवारा, ग्वारीघाट, सिद्धघाट , सरस्वती घाट और लम्हेटाघाट — पर प्रशासन ने विशेष व्यवस्था की है।
* श्रद्धालुओं की सुरक्षा हेतु पुलिस बल और जल पुलिस की तैनाती की गई है।
* नगर निगम द्वारा घाटों की सफाई, प्रकाश व्यवस्था और पेयजल की व्यवस्था की गई है।
* स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्राथमिक उपचार केंद्रों के साथ मौजूद रहेंगी।
रात्रि में घाटों पर दीपदान और आरती के भव्य आयोजन होंगे, जिनसे पूरा क्षेत्र प्रकाशमय हो उठेगा।
पंचकोशी परिक्रमा कल
कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर जबलपुर की प्रसिद्ध नर्मदा पंचकोशी परिक्रमा यात्रा का आयोजन कल मंगलवार को होगा।
यह यात्रा हरे कृष्णा आश्रम भेड़ाघाट से प्रातः आरंभ होकर बैनगंगा पुल, चौसठ योगिनी मंदिर, धुआंधार, कल्याणिका तपोवन, पशुपतिनाथ मंदिर, तिलमांडेश्वर, लम्हेटाघाट होते हुए नाव द्वारा लम्हेटी, इमलिया, डुडवारा, ग्वारी, ललपुर, सिद्धन माता आश्रम से सरस्वती घाट होकर पुनः हरे कृष्णा आश्रम में संपन्न होगी।
इस परिक्रमा में हजारों श्रद्धालु सम्मिलित होंगे। प्रशासन द्वारा संपूर्ण यात्रा मार्ग पर सुरक्षा, यातायात और नाव संचालन के लिए सख्त प्रबंध किए गए हैं।
सरोवरों में भी कार्तिक स्नान
शहर के विभिन्न सरोवरों हनुमानताल, अधारताल गोकलपुर देवताल रांझी, सदर बरगी, आदि में भी श्रद्धालु कार्तिक स्नान और दीपदान करेंगे। धार्मिक संस्थाओं द्वारा भजन-कीर्तन, सत्संग और लंगर सेवा के आयोजन किए गए हैं।
सर्वधर्म सौहार्द का पर्व
बैकुंठ चतुर्दशी और कार्तिक पूर्णिमा दोनों पर्व संस्कारधानी की संस्कृति में सर्वधर्म सौहार्द और समरसता के प्रतीक हैं। नर्मदा किनारे एक साथ हजारों दीपों की ज्योति जलाने का दृश्य न केवल भक्ति का भाव जगाता है, बल्कि नर्मदा मैया के प्रति श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता है। नर्मदा मइया की आरती, दीपदान, पंचकोशी परिक्रमा और स्नान — ये सभी आयोजन आज और कल धार्मिक उत्साह और भक्ति से सराबोर करेंगे।






