104 मुकदमों और 67 लाख के इनाम का अंत: खूंखार नक्सली सुरेंद्र समेत तीन को सुकमा पुलिस को सौंपा

13 में से 12 पूर्व नक्सली पहुंचे गृह जिले, पुनर्वास नीति के तहत रोजगार प्रशिक्षण देकर मुख्यधारा से जोड़ने की पहल
बालाघाट। नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत बालाघाट पुलिस द्वारा आत्मसमर्पित नक्सलियों को उनके गृह जिलों तक पहुंचाने की प्रक्रिया जारी है। इसी क्रम में गुरुवार रात तीन आत्मसमर्पित नक्सलियों को बालाघाट पुलिस ने सुकमा पुलिस के सुपुर्द कर दिया। इसके साथ ही अब तक आत्मसमर्पण करने वाले 13 नक्सलियों में से 12 को उनके गृह जिलों तक भेजा जा चुका है।
सुकमा पुलिस को सौंपे गए नक्सलियों में सुरेंद्र उर्फ सोमा उर्फ कबीर सोढ़ी, नवीन नुप्पो उर्फ हिडमा और विक्रम उर्फ हिडमा वट्टी शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार तीनों लंबे समय तक नक्सली संगठन से जुड़े रहे और इनके खिलाफ विभिन्न गंभीर आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं।
सुरेंद्र पर 67 लाख का इनाम
पुलिस के मुताबिक आत्मसमर्पित नक्सली सुरेंद्र उर्फ सोमा उर्फ कबीर सोढ़ी नक्सली संगठन में एसजेडसीएम (SZCM) स्तर पर सक्रिय था। उस पर तीन राज्यों की पुलिस द्वारा कुल 67 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। उसके खिलाफ विभिन्न स्थानों पर 104 आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।
इसी तरह नवीन नुप्पो उर्फ हिडमा पर 14 लाख रुपये का इनाम घोषित था तथा उसके खिलाफ 30 मामले दर्ज बताए गए हैं। वहीं विक्रम उर्फ हिडमा वट्टी पर भी 14 लाख रुपये का इनाम घोषित था और उसके विरुद्ध एक मामला दर्ज बताया गया है।
13 में से 12 को घर भेजा
एसपी आदित्य मिश्रा के अनुसार 11 दिसंबर को बालाघाट जिले को नक्सल मुक्त घोषित किए जाने के बाद जिले में कुल 13 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। आत्मसमर्पण के बाद पुलिस एवं प्रशासन द्वारा इनके पुनर्वास और मुख्यधारा में वापसी के लिए आवश्यक प्रक्रिया शुरू की गई।
पूर्व में तीन चरणों में 9 आत्मसमर्पित नक्सलियों को उनके गृह जिलों में भेजा जा चुका था। इनमें अधिकांश को छत्तीसगढ़ के बीजापुर तथा एक पूर्व नक्सली को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली पुलिस के सुपुर्द किया गया था। अब तीन और नक्सलियों को सुकमा पुलिस के हवाले किए जाने के बाद गृह जिले पहुंचने वाले आत्मसमर्पित नक्सलियों की संख्या 12 हो गई है।
पुलिस के अनुसार अब केवल पालागोंदी निवासी एक आत्मसमर्पित नक्सली को उसके गृह जिले भेजने की प्रक्रिया शेष है।
बीजापुर और गढ़चिरौली भेजे गए थे पूर्व नक्सली
इससे पहले आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में सुनीता ओयाम, जयशीला उर्फ ललिता ओयाम, जरीना उर्फ जोगी मुच्चासी, शिल्पा उर्फ सुक्की नुप्पो, समर उर्फ समारू उर्फ राजू अतरम, सलिता उर्फ सावित्री अलावा और रोहित उर्फ मंगलु को बीजापुर पुलिस के सुपुर्द किया गया था। वहीं राकेश होड़ी उर्फ मनीष को महाराष्ट्र की गढ़चिरौली पुलिस के हवाले किया गया।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि आत्मसमर्पण के बाद पूर्व नक्सलियों को केवल सुरक्षा व्यवस्था के तहत उनके गृह जिलों तक भेजना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में पुनः स्थापित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य से आत्मसमर्पित नक्सलियों को विभिन्न रोजगारपरक एवं कौशल विकास प्रशिक्षण दिए गए।
इनमें टेलरिंग, फार्मिंग, ब्यूटीशियन, इलेक्ट्रिशियन, जेसीबी संचालन तथा कृषि उपकरणों से संबंधित कार्यों का प्रशिक्षण शामिल है। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें रोजगार प्राप्त करने और आत्मनिर्भर बनने के लिए तैयार किया गया है।
पुलिस प्रशासन के अनुसार आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास की यह प्रक्रिया पूर्व नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य सामाजिक जीवन में लौटने तथा परिवार के साथ सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन शुरू करने का अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।







