हाथियों के जिम्मे प्रदेश के टाइगर रिजर्व की सुरक्षा की कमान

हाथियों के जिम्मे प्रदेश के टाइगर रिजर्व की सुरक्षा की कमान
– वन विभाग के गश्ती दल के साथ हाथी कर रहे गश्त
– 1 अक्टूबर तक जंगल सफारी पर रहती है पाबंदी
भोपाल यशभारत। मप्र के टाइगर रिजर्व के वन्यप्राणियों और वन संपदा की सुरक्षा की कमान हाथियों के जिम्मे है। वन विभाग के गश्ती दल के साथ हाथियों दल अलग अलग क्षेत्रों में गश्त कर रहा है। विशेष प्रशिक्षण प्राप्त इन हाथियों को दुर्गम स्थलों पर भी भेजा जा रहा है। 15 जून से 1 अक्टूबर तक जंगल सफारी पर प्रतिबंध रहती है। ऐसे में शिकारी मूवमेंट की संभावना ज्यादा रहती है। मानसून के दौरान शिकारी वन्यप्राणियों व वन संपदा को नुकसान पहुंचाते हैं। पूर्व में भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए हाथियों से गश्त कराई जा रही है। प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व में से एक सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में हाथी लगातार गश्ती कर जंगल की सुरक्षा कर रहे हैं। इसी तरह बांधवगढ़ व संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान में भी हाथियों को जिम्मा सौंपा गया है।
हाथियों को कैंप में मिलेगी राहत
1 अक्टूबर तक जंगल सफारी पर पाबंदी रहती है पर्यटकों की आवाजाही शुरू होने के पहले हाथियों को सात दिन का आराम दिया जाता है। हर साल यह समय निर्धारित किया गया है। पुनर्यौवनीकरण शिविर को सितंबर माह में यह शिविर शुरू हो जाएगा। इस कैंप में हाथियों से कोई काम नहीं कराया जाता है, बल्कि हाथियों की महावत सेवा करते हैं। इन दिनों में हाथियों की मालिश, उनका उपचार और स्वास्थ्य का परीक्षण कराया जाता है. साथ ही उनका पसंदीदा भोजन उन्हे खिलाया जाता है।
वन एवं वृक्ष आवरण में बेहतर है मप्र
भारत वन स्थिति रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश 85724 वर्ग किलोमीटर वन और वृक्ष आवरण के साथ देश में शीर्ष स्थान पर है। राज्य का वन आवरण क्षेत्र 77073 वर्ग किलोमीटर है, जो देश में सर्वाधिक है। मध्यप्रदेश ने देश में सबसे पहले 1973 में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम लागू किया था। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की संभावित सूची में शामिल किया गया है।
हाथियों के भरोसे ही सभी टाइगर रिजर्व
मध्यप्रदेश में सबसे अधिक 9 टाइगर रिजर्व हो गए हैं। इनमें कान्हा, पेंच, बांधवगढ़, पन्ना, सतपुड़ा, वीरांगना दुर्गावती, संजय-डुबरी, रातापानी और अब माधव टाइगर रिजर्व शामिल हैं। इन सभी में हाथियों को सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया है। प्रदेश में 11 नेशनल पार्क, 24 अभयारण्य हैं। सफेद बाघों के संरक्षण के लिए मुकुंदपुर में व्हाइट टाइगर सफारी विकसित की गई है।
प्रदेश में टाइगर रिजर्व की यात्रा को हुए 52 वर्ष
प्रदेश के 9 टाइगर रिजर्व में सबसे पहले 1973 में कान्हा किसली राष्ट्रीय उद्यान को टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था। इसके बाद पेंच टाइगर रिजर्व-1992, पन्ना टाइगर रिजर्व-1993-94, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व 1993-94, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व-1999-2000, संजय टाइगर रिजर्व-2011, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व-2023, रातापानी टाइगर रिजर्व-2024 और माधव टाइगर रिजर्व-2025 में घोषित किए गए।
मानव वन्य जीव संघर्ष को कम करने की योजना
मध्यप्रदेश सरकार ने वन्य जीव संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए वन्य जीव कॉरिडोर विकसित किए हैं। इसी उद्देश्य से हाथियों से गश्त कराई जा रही है। ताकि वन्य जीव संघर्ष को कम किया जा सके। हाथियों की मौजूदगी के कारण हिंसक वन्यप्राणी डरे हुए रहते हैं इसकारण हमला नहीं करते हैं। हालांकि कई बार हाथियों को भी हिंस वन्यप्राणी का सामना करना पड़ सकता है।







