
जबलपुर, यश भारत। जिले में नशामुक्ति अभियान को प्रभावी बनाने और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास तंबाकू-गुटखे की बिक्री पर रोक लगाने के लिए कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने प्रशासनिक अमले की फौज तो खड़ी कर दी है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। कलेक्टर के निर्देश पर अनुविभागवार (एसडीएम के नेतृत्व में) विशेष उड़नदस्तों का गठन तो कर दिया गया है, लेकिन धरातल पर इन दलों की सक्रियता ‘शून्य’ नजर आ रही है। आज भी शहर के प्रमुख स्कूल-कॉलेजों के ठीक बाहर थड़ियों और पान की दुकानों पर खुलेआम तंबाकू उत्पादों और गुटखे की बिक्री जारी है। कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, इन विशेष दलों में एसडीएम, एसडीओपी, तहसीलदार, थाना प्रभारी, ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर, नगर निगम के संभागीय अधिकारी, आबकारी निरीक्षक, औषधि निरीक्षक और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को शामिल किया गया है। इतने बड़े लाव-लश्कर और अधिकारियों की भारी-भरकम फौज होने के बावजूद शहर के शैक्षणिक परिसरों के 100 मीटर के दायरे में चल रही अवैध दुकानों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
कोटपा एक्ट’ की उड़ रही धज्जियां
नियमों के मुताबिक किसी भी शैक्षणिक संस्थान के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है। कलेक्टर ने सभी दलों को नियमित रूप से कार्रवाई कर प्रतिदिन की रिपोर्ट सीधे कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद मैदानी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। छात्र-छात्राएं आसानी से इन दुकानों तक पहुंच रहे हैं, जिससे युवा पीढ़ी में नशे की लत का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है।







