जबलपुरदेशमध्य प्रदेशराज्य

2013 के नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मिलेगा मुआवजा, हाईकोर्ट ने 2015 का अवार्ड किया निरस्त

जबलपुर,यश ,भारत

2013 के नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मिलेगा मुआवजा, हाईकोर्ट ने 2015 का अवार्ड किया निरस्त

जबलपुर,यश ,भारत । मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में याचिकाकर्ता को बड़ी राहत देते हुए वर्ष 2015 में पारित मुआवजा अवार्ड को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने निर्देश दिया है कि मुआवजे का पुनर्निर्धारण “निष्पक्ष मुआवजा एवं भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013” के तहत किया जाए।

न्यायमूर्ति मनीन्दर एस. भट्टी की एकलपीठ ने राम कुमार गुप्ता बनाम कलेक्टर, दमोह एवं अन्य (रिट याचिका क्रमांक 14814/2015) में यह निर्णय सुनाया। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशीष त्रिवेदी प्रशांत अवस्थी असीम त्रिवेदी और आनंद कुमार शुक्ला ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखा, जबकि राज्य शासन की ओर से पैनल अधिवक्ता ने न्यायालय में अपना पक्ष प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता आनंद कुमार शुक्ला ने तर्क दिया कि संबंधित मुआवजा अवार्ड 29 अप्रैल 2015 को पारित किया गया था। उस समय तक भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 समाप्त हो चुका था और 1 जनवरी 2014 से निष्पक्ष मुआवजा एवं भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन में पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013 लागू हो चुका था। इसलिए मुआवजे का निर्धारण नए कानून के अनुसार किया जाना चाहिए था। न्यायालय ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए वर्ष 2015 के अवार्ड को निरस्त कर दिया।

हाईकोर्ट ने प्रकरण को पुनः भूमि अधिग्रहण अधिकारी-सह-अनुविभागीय अधिकारी के पास भेजते हुए निर्देश दिए हैं कि आदेश की प्रमाणित प्रति प्रस्तुत किए जाने की तिथि से 90 दिनों के भीतर वर्ष 2013 के अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार नया मुआवजा निर्धारित कर ताजा अवार्ड पारित किया जाए।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button