
हादसे के बाद जागता है प्रशासन फिर सो जाता, अतिक्रमण और लापरवाही में घिरा जबलपुर
जबलपुर, यश भारत। गढ़ापाटक, गंजीपुरा और कपड़ों के प्रमुख बाजारों में दुकानें खुलते ही फुटपाथ और सड़क तक कब्जा फैल जाता है। नगर निगम की बार-बार की अतिक्रमण कार्रवाई के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बाद कार्रवाई सिर्फ बुकिंग’ तक सीमित रहती है, वास्तविक सुधार कभी दिखाई नहीं देता। हाल ही में सतना बिल्डिंग के आसपास के निवासियों ने भी शिकायत की थी कि अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफनिगम ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया-नतीजा, आग जैसी घटनाओं के रूप में शहर को भुगतना पड़ता है।

सतना बिल्डिंग में अवैध कारखाना उजागर
मंगलवार को सतना बिल्डिंग स्थित बहुमंजिला परिसर में कपड़े के कारखाने में भीषण आग लगी। जांच में सामने आया कि यह कारखाना बिना फयर एनओसी और बिना अनुमति के सघन रिहायशी इलाके में संचालित हो रहा था। गनीमत रही कि फायर स्टेशन पास था, वरना पूरी कॉलोनी तबाह हो सकती थी। जानकारी मिली कि लगभग 20 वर्ष पहले यहां

गत दिवस सतना बिल्डिंग के पास हुआ हादसा।
केवल रिहायशी नक्शा पास हुआ था, लेकिन लगातार आपत्तियां आने के बावजूद न निगम ने कारखाने को रोका और न ही मालिक के खिलाफकोई सख्त कार्रवाई की। इससे प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
दो दिन में दो भीषण आग, और पुरानी त्रासदियों की याद
पिछले 48 घंटों में बड़ा फुहारा-घमंडी चौक क्षेत्र की दो कपड़ा दुकानों में आग लगने की घटनाओं ने शहर को दहला दिया। तीन मंजिला दुकान में लगी आग से करोड़ों का स्टॉक जलकर खाक हो गया। दमकल की पांच-छह गाड़ियों ने कई चक्कर लगाकर आग पर काबू पाया। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि थोड़ी सी देर और होती, तो पूरा बाजार इसकी चपेट में आ जाता। इससे पहले अप्रैल 2025 में दीनदयाल चौक के निजी अस्पताल में आगजनी में कई लोगों की जान गई थी। उस समय कड़े नियम लागू किए गए थे, मगर समय बीतते ही प्रशासन की कार्रवाई पिर ठंडे बस्ते में चली गई। लगातार आग की घटनाएं बता रही हैं कि शहर में सुरक्षा मानकों की अनदेखी जारी है। प्रशासन हादसों के बाद कुछ समय के लिए सक्रिय होता है, फिर हालात फिर से उसी ढरें पर लौट आते हैं और शहर हर बार जोखिम में छोड़ दिया जाता है।

संकरी गलियां और आपातकालीन सेवाओं की चुनौती
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सतना बिल्डिंग और आसपास की गलियां इतनी संकरी हैं कि वमकल वाहन अंदर तक मुश्किल से पहुंच पाते हैं। ऊपर से बेढंगे अति मण और उलड़ो बिजली के तार स्थिति को और अधिक खतरनाक बना देले हैं। नियमों के अनुसार रिहायशी क्षेत्रों में सड़कें इतनी चौड़ी होनी चाहिए कि फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस तुरंत पहुंच सकें, लेकिन यहां इसकी खुली अवहेलना देखी जा रही है। मंगलवार की घटना में भी दमकल वाहन को तार हटाकर रास्ता बनाना पड़ा।
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समाजसेवियों और प्रतिनिधियों ने उठाई आवाज
इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस के नेताओं ने इस क्षेत्र को लेकर अभियान की शुरूआत की है। इस अभियान को समर्थन देते हुए मुकेश राठौर, दिनेश यादव, राकेश चौधरी, लाल जैन, शरद समय, डॉ. मोइन अंसारी, चंदन श्रीवास्तव, किशोर तिवारी, कालू जैन सहित कई सामाजिक संस्थाओं एवं जागरूक नागरिकों ने नगर निगम प्रशासन को फौरन कार्रवाई करने का निवेदन किया है। नगर निगम के फायर अधीक्षक कुशाग्र ठाकुर ने बताया कि दमकल दल 40-45 मिनट में आग पर काबू पाने में सफल रहा। उन्होंने कहा कि ज्यादातर आग की घटनाएं शॉर्ट सर्किट और लापरवाही के कारण होती हैं। अगर दुकानों और कारखानों में लाइट लोडिंग, वायरिंग और सामान की सेफ्टी का ध्यान रखा जाए तो हादसे कम होंगे। उन्होंने अपील की कि लोग ओवरलोडिंग न करें और सुरक्षा मानकों का पालन करें, ताकि ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें।







