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आलू 50 रुपए का 4 किलो, टमाटर 30 रुपए  किलो 

कछपुरा ब्रिज पर शाम को सजने लगी मंडी,हो सकता है कभी बड़ा हादसा

आलू 50 रुपए का 4 किलो, टमाटर 30 रुपए  किलो 

कछपुरा ब्रिज पर शाम को सजने लगी मंडी,हो सकता है कभी बड़ा हादसा

जबलपुर यश भारत।इन दिनों कछपुरा ब्रिज पर बना फुटपाथ पूरी तरह मंडी में तब्दील हो गया है।शाम होते ही फुटपाथ पर लगे ठेले और सब्जियों की दुकानों में रखे मेगा हेन्ड स्पीकर चीखने लगते हैं। आलू 50 का चार किलो, टमाटर 30 का एक किलो।जिसकी आवाज से न केवल दुकानों में खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ती है, वहीं सड़क से गुजरने वाले वाहनों का ध्यान भी भंग हो जाता है। फुटपाथ पर लगे ठेले, दुकानों पर इतनी भीड़ हो जाती है कि खरीदारों के वाहन  आधी से ज्यादा सड़क को घेर लेती है। इससे वहां से गुजरने वाले वाहनों में भिड़ंत होने की ज्यादा संभावना हो जाती है। दूसरी ओर फुटपाथ पर दुकानों के लगने से पैदल राहगीरों का फुटपाथ से गुजरना नामुमकिन हो जाता है। हालांकि छोटे मोटे हादसे तो होते रहते हैं। लेकिन कभी भी किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता है।
ताज्जुब की बात है कि नगर निगम द्वारा करोड़ों रुपए खर्च कर हाकर जोन बना दिया गया है। लेकिन सब्जी विक्रेता वहां दुकान लगाने की अपेक्षा ओवर ब्रिज के फुटपाथ पर दुकान लगा रहे हैं।

यद्यपि नगर निगम के आयुक्त अतिक्रमण को लेकर गंभीर हैं। लेकिन मातहत अधिकारियों को इसकी चिंता नहीं है। शायद जब कोई हादसा हो जायेगा तब शायद उनकी नींद टूटेगी। यूं तो गुलौआ चौक पर भी सब्जी खेलों का जमावड़ा होने लगा है। जो गलत तो है लेकिन चौड़ीकरण के कारण किसी न किसी तरह यातायात चलता रहता है। मगर कछपुरा ब्रिज पर तो स्थिति गंभीर हो जाती है। कुछ महीनों पहले अतिक्रमण दस्ता सक्रिय रहा तो सड़कें अतिक्रमण मुक्त रही और सुलभ यातायात बना रहा। मगर अब अतिक्रमण दस्ते को कछपुरा ब्रिज पर नजरें इनायत करने का समय ही नहीं है। वैसे भी आजकल शहर में यातायात का दबाव बढ़ता जा रहा है। जिससे दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं। बीते दिनों बरेला में सुरक्षित जोन में खाना खा रहे मजदूरों की जानें चली गई। और कई घायल अभी भी अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। लेकिन कछपुरा ब्रिज में न कोई बाड़ लगी है और न कोई सुरक्षित जोन है। छोटे बड़े वाहन फर्राटा भर कर गुजरते हैं। अक्सर देखा गया है कि दुर्घटनाओं के बाद सहानुभूति दिखाने, घड़ियाली आंसू बहाने वालों के साथ आंदोलनकारी प्रकट हो जाते हैं। सवाल यह है कि ऐसी स्थिति बनने क्यों दी जाए।जिम्मेदार अपनी ड्यूटी निभाएं और जन प्रतिनिधि लोगों को जागरूक करें और पैदा होने वाली विषम परिस्थितियों को टालें।

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