भोपाल

अब भोपाल की जनता तय करेगी मास्टर प्लान की तस्वीर

अब भोपाल की जनता तय करेगी मास्टर प्लान की तस्वीर 

– 30 दिन में दावे-आपत्तियां, सुझावों पर होगी सुनवाई, इसके बाद अंतिम प्रारूप की ओर बढ़ेगा शहर का विकास 

भोपाल, यश भारत। राजधानी के अगले दो दशक के विकास की दिशा तय करने वाले मास्टर प्लान-2047 का प्रारूप जारी होने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण चरण शुरू हो गया है। शहर के रहवासी, दुकानदार, कॉलोनाइजर, कारोबारी, किसान, विशेषज्ञ और अन्य हितधारक प्रस्तावित भूमि उपयोग और विकास योजनाओं पर अपनी आपत्तियां और सुझाव दे सकेंगे। इसके लिए करीब 30 दिन का समय दिया गया है। प्राप्त सुझावों पर विचार और सुनवाई के बाद प्रारूप में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे। इसके बाद मास्टर प्लान को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
दुकान, मकान और जमीन पर पड़ेगा सीधा असर
मास्टर प्लान का असर भोपाल के हजारों परिवारों और कारोबारियों पर सीधे पड़ सकता है। किस क्षेत्र में मकान बनेंगे, कहां कारोबार की अनुमति होगी, किन इलाकों में हरित क्षेत्र रहेगा, नई सडक़ें और परिवहन मार्ग कहां विकसित होंगे और शहर का विस्तार किस दिशा में होगा, इन सभी का निर्धारण प्रस्तावित योजना से होगा। खासकर उन क्षेत्रों के लोगों की नजरें इस प्रक्रिया पर हैं, जहां अभी आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां एक साथ संचालित हो रही हैं।
आपत्ति के बाद होगी सुनवाई, फिर बदल सकता है प्रारूप
अब नागरिक प्रस्तावित भूमि उपयोग, सडक़, हरित क्षेत्र, व्यावसायिक गतिविधियों और विकास संबंधी प्रावधानों पर अपनी बात रख सकेंगे। नगर तथा ग्राम निवेश विभाग प्राप्त दावे-आपत्तियों और सुझावों का परीक्षण करेगा। जरूरत के अनुसार प्रस्तावों में संशोधन भी किया जा सकता है। इसके बाद संशोधित योजना को अंतिम स्वीकृति की दिशा में ले जाया जाएगा।
61 हजार हेक्टेयर में फैलेगा नियोजित भोपाल
मास्टर प्लान-2047 में नियोजित क्षेत्र को करीब 61017 हेक्टेयर तक बढ़ाने का प्रस्ताव है। इसमें आवासीय क्षेत्र के साथ मिश्रित उपयोग, व्यावसायिक, औद्योगिक, सार्वजनिक उपयोग और परिवहन के लिए अलग-अलग क्षेत्र निर्धारित किए गए हैं। हरित क्षेत्र को भी बड़े स्तर पर बढ़ाने का प्रस्ताव है। योजना में करीब 3000 हेक्टेयर क्षेत्र में 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है।
ग्रोथ कॉरिडोर बदलेगा शहर के विस्तार की दिशा
प्रस्तावित ग्रोथ कॉरिडोर में आवास के साथ होटल, अस्पताल, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डाटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स, थोक व्यापार, मॉल, कार्यालय और शिक्षा जैसी गतिविधियों के लिए जगह विकसित करने की योजना है। इससे शहर के मौजूदा हिस्सों पर बढ़ते दबाव को कम करने और नए विकास क्षेत्रों को तैयार करने का प्रयास किया जाएगा।
हरित भोपाल पर भी जोर
प्रारूप में हरित क्षेत्र बढ़ाने का प्रस्ताव है। भोजताल, जंगल, पहाडय़िों और अन्य प्राकृतिक क्षेत्रों के संरक्षण को योजना में महत्व दिया गया है। इसके अलावा नई सडक़ों और विकास क्षेत्रों के साथ हरित पट्टियों का प्रावधान भी किया गया है। इससे आने वाले वर्षों में शहर की आबादी बढऩे के साथ पर्यावरण और खुले क्षेत्रों को सुरक्षित रखने की दिशा तय होगी।
अभी अंतिम नहीं है मास्टर प्लान
प्रारूप जारी होने का मतलब यह नहीं है कि प्रस्तावित प्रावधान तत्काल अंतिम रूप से लागू हो गए हैं। फिलहाल नागरिकों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया है। इसके बाद आपत्तियों-सुझावों की प्रक्रिया, उनका परीक्षण और सुनवाई होगी। अंतिम रूप दिए जाने से पहले संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया भी पूरी करनी होगी। इसलिए भोपाल के लोगों के लिए फिलहाल सबसे अहम मौका अपने क्षेत्र से जुड़े प्रस्तावों को समझकर समय सीमा में आपत्ति या सुझाव दर्ज कराने का है।
आम आदमी के लिए क्यों अहम है यह चरण
मास्टर प्लान केवल सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि अगले वर्षों में शहर में रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा विकास खाका है। सडक़, यातायात, आवास, बाजार, रोजगार, हरियाली और जमीन के उपयोग से जुड़े फैसलों का असर सीधे नागरिकों पर पड़ेगा। ऐसे में अब शहर के लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि दावे-आपत्तियों के बाद मास्टर प्लान-2047 का अंतिम स्वरूप कैसा बनता है।

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