मेरा यादगार केसः सुलगते शहर के बीच कुछ महिला आरक्षकों को लेकर चट्टान बन गईं एसीपी मिलन जैन

मेरा यादगार केसः सुलगते शहर के बीच कुछ महिला आरक्षकों को लेकर चट्टान बन गईं एसीपी मिलन जैन
बरेली कांड 2012: चारों तरफ मौत थी, सीनियर अफसर भी घायल हो चुके थे; पर मेरी महिला ब्रिगेड की राइफलों ने दंगाइयों को भागने पर मजबूर कर दिया!
अरविंद कुमार कपिल
भोपाल, यशभारत: खाकी सिर्फ एक वर्दी नहीं, बल्कि संकट के समय अडिग रहने वाले हौसले का नाम है। आज हमारे साथ खास बातचीत में मौजूद हैं भोपाल की वर्तमान एसीपी ट्रैफिक मिलन जैन। ग्वालियर जिले की रहने वाली और बीकॉम व एलएलबी की उच्च शिक्षा प्राप्त मिलन जैन ने साल 1999 बैच की सूबेदार के रूप में पुलिस करियर की शुरुआत की थी। वे सिवनी, विदिशा, रायसेन, मुरैना और सीहोर जैसे जिलों में अपनी धाक जमा चुकी हैं। उनके पूरे करियर में साल 2012 का बरेली किसान आंदोलन एक ऐसा पन्ना है, जिसे याद कर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। आइए जानते हैं उस खौफनाक मंजर और इनकी जांबाजी की अनसुनी कहानी, उन्हीं की जुबानी।
सवाल: आपके पूरे करियर में रायसेन जिले के बरेली का वो केस सबसे यादगार और चुनौतीपूर्ण क्यों माना जाता है?
एसीपी मिलन जैन: वह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि जिंदगी और मौत के बीच का वो इम्तिहान था जिसे मैं कभी नहीं भूल सकती। साल 2012 में एक किसान की कथित खुदकुशी के बाद बरेली में करीब दो से ढाई हजार किसानों की उग्र भीड़ सड़कों पर थी। चक्काजाम पथराव और आगजनी से पूरा इलाका सुलग रहा था। पुलिस फायरिंग में एक पूर्व सरपंच की मौत के बाद तो भीड़ का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया था। उन्होंने पुलिस और प्रशासन की गाड़ियां फूंक दी थीं और थाने को चारों तरफ से घेर लिया था।
सवाल: उस वक्त मौके पर स्थिति क्या थी? क्या आपको सीनियर अधिकारियों का बैकअप मिल रहा था?
एसीपी मिलन जैन: स्थिति यह थी कि बड़े-बड़े अधिकारियों को पीछे हटना पड़ा था। उग्र भीड़ के पथराव में तत्कालीन कलेक्टर मोहनलाल मीणा, एसपी आईपी कुलश्रेष्ठ सहित दो दर्जन से ज्यादा पुलिसकर्मी लहूलुहान हो चुके थे। भारकच्छ और सिलवानी के थाना प्रभारियों की हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें तुरंत भोपाल रेफर करना पड़ा। जब मैंने चारों तरफ नजर दौड़ाई, तो सीनियर अफसर घायल होकर जा चुके थे। मेरे पास बैकअप के नाम पर सिर्फ मुट्ठी भर महिला आरक्षक और कुछ सिपाही थे। चारों तरफ से घिर चुके थे, मौत सामने खड़ी थी।
सवाल: जब आला अफसर जा चुके थे और आप केवल कुछ महिला आरक्षकों के साथ थीं, तो मन में डर नहीं लगा?
एसीपी मिलन जैन: डरना हमारी ट्रेनिंग का हिस्सा नहीं है। हां, उस मंजर को देखकर एक पल के लिए रोंगटे जरूर खड़े हो गए थे, लेकिन मैंने तय किया कि मैं मैदान छोड़कर नहीं भागूंगी। हमारे जो साथी घायल हुए थे, पहले मैंने और मेरी महिला आरक्षकों ने सूझबूझ दिखाकर उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। मुझे पता था कि अगर इस वक्त हम पीछे हटे, तो यह उग्र भीड़ पूरे थाने को नेस्तनाबूद कर देगी।
सवाल: आंसू गैस के गोले भी फेल हो चुके थे, फिर आपने उस हजारों की बेकाबू भीड़ को कैसे काबू किया?
एसीपी मिलन जैन: आंसू गैस के गोलों का भीड़ पर कोई असर नहीं हो रहा था और पत्थर लगातार बरस रहे थे। जब मैंने देखा कि अब कोई विकल्प नहीं बचा है, तो मैंने तुरंत अपनी महिला आरक्षकों को राइफलें उठाकर सीधे भीड़ पर तानने का आदेश दिया। जैसे ही मेरी टीम ने मुस्तैदी से राइफलें तानीं और भीड़ ने महिला पुलिस बल का यह सख्त व आक्रामक रूप देखा, वैसे ही हजारों की उस भीड़ के हौसले पस्त हो गए। राइफल तनते ही पूरी भीड़ कदम पीछे खींचने और भागने पर मजबूर हो गई। इस तरह सूझबूझ से एक बड़ी अनहोनी टली और बाद में वहां कर्फ्यू लगाया गया।
सवाल: ग्वालियर से भोपाल तक का आपका यह सफरनामा कैसा रहा? आपकी पढ़ाई ने इसमें क्या भूमिका निभाई?
एसीपी मिलन जैन: मैं मूल रूप से ग्वालियर जिले की ही रहने वाली हूँ और मेरी शुरुआती व उच्च शिक्षा भी वहीं हुई। मैंने ग्वालियर से बीकॉम और फिर एलएलबी की पढ़ाई की। कानून की इस पढ़ाई ने मुझे हमेशा विपरीत परिस्थितियों में भी सही समय पर सटीक और कानूनी फैसले लेने की समझ दी। 1999 में पुलिस सेवा में आने के बाद मेरी पहली पोस्टिंग सिवनी में हुई। इसके बाद विदिशा, सीहोर और भोपाल में रक्षित निरीक्षक के रूप में लंबा वक्त बीता। आज भोपाल में एसीपी ट्रैफिक के रूप में सेवाएं दे रही हूँ। हर जिले ने मुझे कुछ न कुछ सिखाया, लेकिन बरेली की उस रात ने मुझे महिला शक्ति की असली ताकत का अहसास कराया।
सवाल: आज की युवा महिला पुलिस अधिकारियों या बेटियों को आप क्या संदेश देना चाहेंगी?
एसीपी मिलन जैन: मैं सिर्फ इतना कहूंगी कि खुद को कभी कमजोर मत समझो। परिस्थितियां कितनी भी विपरीत हों, अगर आपका इरादा पक्का है तो हजारों की भीड़ भी आपके सामने घुटने टेक देगी। संकट के समय सही रणनीति, त्वरित फैसला और साहस ही आपकी सबसे बड़ी ताकत है।







