हेडकांस्टेबल की पत्नी ने फांसी लगाकर जान दी
-आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं
भोपाल यशभारत।
जहांगीराबाद इलाके में रहने वाले पुलिस हेड कॉस्टेबल की पत्नी ने कल अपने घर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक जहांगीराबाद निवासी चांदनी भदौरिया पति दिनेश भदौरिया (30) गृहणी थी। उनके पति पुलिस विभाग में हेड कॉस्टेबल के पद पदस्थ हैं। बीती रात वह अपने बच्चों को घुमाने के लिए लाल परेड ले गए थे। जहां से जब वह लौटे तो देखा कि कमरे का गेट अंदर से बंद है। जिसे खुलवाने के लिए पति दिनेश ने काफी देर तक आवाज लगाई, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया और गेट अंदर से नहीं खुला तो उन्होंने गेट तोड़ दिया। अंदर जाकर देखा तो उनकी पत्नी फंासी के फंदे पर लटकी हुईं थी। उन्होंने तुरंत पत्नी को फंदे से नीचे उतारा और एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने मृतका का शव बरामद कर उसे पोस्टमार्टम के लिए हमीदिया अस्पताल भेज दिया। पुलिस को कमरे की तलाशी लेने पर कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। जिससे आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस ने महिला के मोबाइल फोन को जब्त कर लिया है। पुलिस का कहना है कि परिजनों के बयान दर्ज होने के बाद ही कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है।

समृद्ध किसान, समृद्ध प्रदेश का लक्ष्य , वंदे मातरम गायन के साथ शुरू हुआ कार्यक्रम कृषि कल्याण वर्ष 2026 कार्यशाला में विकास का रोडमैप तय सीएम डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में कृषि, पशुपालन और तकनीक आधारित योजनाओं पर जोर, 55 जिलों के अधिकारी भोपाल में जुटे *भोपाल यश भारत।* मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश को कृषि क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में अभ्युदय मध्यप्रदेश के तहत कृषि कल्याण वर्ष 2026 की राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन राजधानी भोपाल स्थित रविंद्र भवन में किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में प्रदेश के सभी संभागों और 55 जिलों से कृषि विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य समृद्ध किसान, समृद्ध प्रदेश के लक्ष्य को साकार करना रहा, जिसमें कृषि, पशुपालन, सहकारिता, मत्स्य पालन और तकनीकी नवाचारों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम के दौरान जैविक खेती, मिट्टी परीक्षण, ई-विकास प्रणाली और आधुनिक कृषि तकनीकों पर विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। *सीधे किसानों से जुड़ने का प्रयास करें अधिकारी* अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे सीधे किसानों से जुड़कर योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचाएं और संवाद को मजबूत करें। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में रबी और खरीफ दोनों सीजन के लिए बेहतर तैयारी की जा रही है। उर्वरकों की उपलब्धता पर स्पष्ट किया गया कि डी ए पी , यूरिया और एन पी के सहित सभी उर्वरकों की प्रदेश में कोई कमी नहीं है। साथ ही दुष्प्रचार फैलाने वालों को चेतावनी देते हुए कहा गया कि गलत जानकारी से किसानों में भ्रम न फैलाएं। ई-विकास मॉडल बना मिसाल कार्यशाला में ई-विकास पहल को किसानों तक तकनीक आधारित सेवाएं पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बताया गया। जबलपुर, शाजापुर और विदिशा जिलों में इसका पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा है जिसे अब पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी है। *किसानों को हर स्तर पर समर्थन* सरकार द्वारा किसानों को लोन, कृषि यंत्र, उन्नत बीज, उर्वरक, बिजली, सौर ऊर्जा, प्राकृतिक खेती और आपदा के समय मुआवजा जैसी सुविधाएं लगातार उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रदेश में लगभग 55 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित है जिससे उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई है। इसके अलावा मार्केटिंग, सहकारिता, मछली पालन और पशुपालन को भी आय के अतिरिक्त स्रोत के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे सोशल मीडिया के माध्यम से भी किसानों को जागरूक करें और नगदी फसलों को बढ़ावा देने की दिशा में काम करें। *चार राज्यस्तरीय कार्यशालाएं होंगी आयोजित* सरकार ने निर्णय लिया है कि वर्ष 2026 के दौरान चार राज्यस्तरीय कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा ताकि योजनाओं की समीक्षा और सुधार लगातार जारी रहे। कुल मिलाकर यह कार्यशाला मध्यप्रदेश को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रही है जिसमें तकनीक, पारदर्शिता और किसानों से सीधा संवाद प्रमुख आधार बने हैं। संबंधित सभी मंत्रीगण विधायक और अधिकारी गण सम्मिलित रहे
April 30, 2026