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भौतिक युग में मुफ्त कोचिंग गौरीघाट तट पर

शिक्षक पराग दीवान को ईश्वर मानते हैं निर्धन बच्च्े     

भौतिक युग में मुफ्त कोचिंग गौरीघाट तट पर , शिक्षक पराग दीवान को ईश्वर मानते हैं निर्धन बच्च्े                  शिक्षक दिवस पर विशेष
जबलपुर ,यशभारत शिक्षक वह व्यक्ति है जो ज्ञान, संस्कार और मूल्य प्रदान कर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करता है। वह केवल पाठ्यपुस्तकों का ज्ञान ही नहीं देता, बल्कि जीवन जीने की सही दिशा भी दिखाता है। शिक्षक समाज का निर्माता तथा राष्ट्र की रीढ़ होता है।शिक्षक समाज का सबसे महत्वपूर्ण अंग होता है। जिस प्रकार दीपक स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता है, उसी प्रकार शिक्षक अपने ज्ञान द्वारा अज्ञानता का अंधकार दूर करता है। शिक्षक विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करते हैं और उन्हें जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढऩे की प्रेरणा देते हैं। वे केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि अनुशासन, नैतिकता और मानवता का पाठ भी पढ़ाते हैं।

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शिक्षक के बिना शिक्षा अधूरी है और शिक्षा के बिना जीवन एक आदर्श शिक्षक निष्पक्ष, धैर्यवान और विद्यार्थियों के प्रति स्नेहपूर्ण होता है। वह विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करता है और उनकी कमज़ोरियों को दूर करने में मदद करता है। शिक्षक केवल वही नहीं होता जो विद्यालय की कक्षा में खड़ा होकर पाठ पढ़ाता है, बल्कि वह हर वह व्यक्ति है जो दूसरों को ज्ञान, संस्कार और जीवन जीने की दिशा देता है। पराग दीवान इसी सोच के प्रेरणादायक उदाहरण हैं।  रात के समय घाट पर बच्चों का समूह एकत्रित होकर उनसे शिक्षा प्राप्त करता है। साधारण वातावरण, खुला आकाश और सीमित साधन होने के बावजूद पराग दीवान बच्चों के मन में सीखने की जिज्ञासा जगाते हैं। वे न केवल किताबों का ज्ञान बाँटते हैं, बल्कि बच्चों को जीवन के मूल्य, अनुशासन और समाजसेवा का महत्व भी समझाते पराग दीवान जैसे लोग हमें यह सिखाते हैं कि शिक्षक वही है जो नि:स्वार्थ भाव से समाज के भविष्य को संवारने में जुटा हो। वे वास्तव में दीपक की तरह हैं, जो स्वयं जलकर दूसरों के जीवन को प्रकाशित करते हैं।

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