कटनी

नर्मदा के जल से खेत होंगे हरे भरे, किसान होंगे खुशहाल : मुख्यमंत्री, देश की सबसे लंबी जल सुरंग स्लीमनाबाद टनल का डॉ मोहन यादव ने किया निरीक्षण, 6 जिलों के 1450 गांवों और 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को मिलेगा स्थायी सिंचाई लाभ

कटनी, यशभारत। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आज कटनी जिले के स्लीमनाबाद पहुंचकर बरगी व्यपवर्तन परियोजना अंतर्गत दाईं तट मुख्य नहर स्लीमनाबाद टनल का निरीक्षण किया। सीएम ने कहा कि देश की सबसे लंबी सुरंग में बहने वाले नर्मदा के जल का लाभ कटनी समेत 6 जिलों को मिलेगा। 17 वर्षों की कठिन भू-गर्भीय चुनौती के बाद या परियोजना अंतिम चरण में पहुंची है। सरकार की कोशिश है कि जल्द से जल्द किसानों को इसका लाभ मिलने लगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि नर्मदा विकास प्राधिकरण की जिस टीम ने इस टनल में अपनी तकनीकी क्षमता का परिचय दिया है वह बधाई की पात्र है। उनका अभिनंदन करते हुए वे गौरव का अनुभव कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर खेत को जल मिलेगा और हर किसान खुशहाल होगा। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात रहा। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव निर्धारित समय से कुछ विलंब से स्लीमनाबाद में बनाए गए हेलीपेड पहुंचे। यहां क्षेत्र के सांसद वीडी शर्मा, सतना सांसद गणेश सिंह, बहोरीबंद के विधायक प्रणय पांडे, मुड़वारा के विधायक संदीप जायसवाल, बड़वारा विधायक धीरेन्द्र सिंहए, कलेक्टर आशीष तिवारी और पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा सहित भारतीय जनता पार्टी के अन्य नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी अगवानी की। मुख्यमंत्री सीधे टनल स्थल पहुंचे तथा निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री डॉ यादव को कलेक्टर आशीष तिवारी, बरगी व्यपवर्तन परियोजना के कार्यपालन यंत्री सहज श्रीवास्तवए कार्यपालन यंत्री जीआर सिंहए प्रोजेक्ट मैनेजर उग्रसेन सिंह ने परियोजना के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने इस दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा कि 17 वर्षों की अटूट मेहनत का नतीजा आज सबके सामने है। टनल के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने तकनीकी विशेषज्ञों से मशीनों की कार्यप्रणाली की भी पूरी जानकारी ली। उन्होंने मीडिया से कहा कि 11.952 किमी लंबी सुरंग के जरिए नर्मदा का जल विंध्य के खेतों तक पहुंचेगा। टनल के निर्माण में जो परिवार प्रभावित हुए उनका पुनर्वास भी सरकार द्वारा कराया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 6 जिलों के 1450 गांवों और 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई लाभ मिलने से हरियाली बढ़ेगी और किसान खुशहाल होंगे। कटनी, मैहर, सतना और रीवा के खेतों में नर्मदा का जल पहुंचेगा। इस टनल में 4 करोड़ घन मीटर खुदाई हुई है। यह प्रकृति और मानव प्रतिभा का चमत्कार है। इसके निर्माण में लगी टीम हर कदम पर परीक्षा से गुजरी। बीच में मशीन धंसने जैसी कठिन चुनौती भी आई लेकिन जर्मनी की नई मशीन ने आधुनिक तकनीकी से इस बड़े लक्ष्य को पूरा किया। 8 जुलाई 2026 को यह सफलता दर्ज हो गई। राष्ट्रीय राजमार्ग और रेल लाइनों के नीचे से खुदाई का कार्य किसी चमत्कार से कम नहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कृषि और अर्थव्यवस्था में क्रांति लाने वाला कदम है। मां नर्मदा की पावन धारा भी सोनभद्र से जुडऩे का पावन संगम यहां हुआ।

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