राजधानी में फैला अतिक्रमण, घट गई सडक़ों की चौड़ाई

राजधानी में फैला अतिक्रमण, घट गई सडक़ों की चौड़ाई
– लोगों को रोजाना करना पड़ रहा परेशानी का सामाना
यश भारत भोपाल। राजधानी भोपाल की सडक़ें आज विकास की नहीं, बल्कि अिितक्रमण की गिरफ्त में हैं। कभी चौड़ी और सुगम दिखने वाली सडक़ें अब दुकानों, ठेलों और पार्किंग से घिरकर सकरी गलियों में बदल चुकी हैं। नतीजतन, यातायात जाम अब शहर की रोजमर्रा की समस्या बन गया है। सबसे अधिक परेशानी ऑफिस आने-जाने वाले लोगों, स्कूली वाहनों और आपात सेवाओं को उठानी पड़ रही है। शहर के पुराने और नए दोनों ही इलाकों में अतिक्रमण ने पैर पसार लिए हैं। न्यू मार्केट, हमीदिया रोड, टीटी नगर, छोला, कोलार, शाहपुरा, बैरागढ़ और अयोध्या बायपास रोड जैसे क्षेत्रों में दुकानदारों ने फुटपाथों और सडक़ किनारों तक अपने अस्थायी ढांचे खड़े कर लिए हैं। कहीं फल-सब्जी के ठेले हैं, तो कहीं वाहन खड़े होने की जगह दुकानों के सामने ग्राहकों की पार्किंग में बदल चुकी है।
नगर निगम की ओर से बार-बार हटाने की कार्रवाई के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। कुछ दिनों तक सफाई और सडक़ें खुली दिखती हैं, लेकिन जैसे ही निगरानी ढीली पड़ती है, अतिक्रमण फिर लौट आता है।
ट्रैफिक जाम बना रोजमर्रा की समस्या
अतिक्रमण का सबसे बड़ा असर शहर के ट्रैफिक पर पड़ा है। जहां पहले दो लेन पर वाहन आसानी से निकल जाते थे, वहीं अब सिर्फ एक लेन बची है। रोशनपुरा, न्यू मार्केट, एमपी नगर, 10 नंबर मार्केट और भेल क्षेत्र में शाम के समय जाम आम दृश्य बन चुका है। कई बार एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड को भी रास्ता नहीं मिल पाता, जिससे आपात सेवाओं पर असर पड़ता है। रोजाना ऑफिस या स्कूल जाने वाले नागरिकों का कहना है कि सडक़ें अब जनता के लिए नहीं, दुकानदारों और अवैध कब्जेदारों के लिए बन गई हैं। कोलार रोड निवासी रेखा दुबे बताती हैं, “हर दिन सुबह और शाम को ट्रैफिक जाम में फंसना अब आम बात हो गई है। सडक़ किनारे ठेले और अवैध पार्किंग ने रास्ता इतना तंग कर दिया है कि वाहन निकालना मुश्किल हो जाता है।”
प्रशासन की कार्रवाई और चुनौतियां
नगर निगम और यातायात पुलिस समय-समय पर अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाते हैं। भारी वाहन, ठेले, टीन शेड और दुकानों के आगे रखे सामान हटाए जाते हैं, लेकिन कार्रवाई स्थायी नहीं हो पाती। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि नागरिकों का सहयोग न मिल पाने से समस्या बढ़ रही है। निगम अधिकारियों का कहना है कि हम नियमित रूप से अभियान चलाते हैं। कई बार दुकानदार खुद जगह छोड़ देते हैं, लेकिन कुछ दिन बाद वही स्थिति लौट आती है। अब हम स्थायी समाधान की दिशा में योजना बना रहे है।
स्थायी समाधान की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कार्रवाई से समस्या खत्म नहीं होगी। जरूरत है संगठित मार्केट ज़ोन, वैकल्पिक ठेला ज़ोन और सख्त पार्किंग नियमों की। इसके साथ ही नागरिकों को भी जिम्मेदारी समझनी होगी। यदि लोग स्वयं अतिक्रमण का समर्थन या उपयोग करना बंद कर दें, तो स्थिति में सुधार संभव है।
कार्रवाई की जाएगी
नगर निगम के अमले को अतिक्रमण करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया गया है। जहां भी अतिक्रमण हुआ है वहां टीम पहुंच रही है। लोगों को समझाइश भी दी जा रही है।
– संस्कृति जैन, कमिश्नर, नगर निगम भोपल







