भोपाल

सतपुड़ा भवन के पास फुटपाथ पर बढ़ा अतिक्रमण – पैदल यात्रियों की बढ़ी परेशानी

सतपुड़ा भवन के पास फुटपाथ पर बढ़ा अतिक्रमण
– पैदल यात्रियों की बढ़ी परेशानी
भोपाल, यश भारत। राजधानी भोपाल के वीआईपी क्षेत्र माने जाने वाले सतपुड़ा भवन के आसपास इन दिनों फुटपाथों पर बढ़ते अतिक्रमण से आम लोगों की परेशानी बढ़ गई है। यहां सड़कों के किनारे और फुटपाथों पर लगातार अवैध ठेले और अस्थायी दुकानें लगने लगी हैं, जिससे पैदल चलने वालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सतपुड़ा भवन के पास का यह इलाका प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां कई शासकीय कार्यालय, विभागीय भवन और आवागमन का प्रमुख मार्ग होने के कारण दिनभर लोगों की आवाजाही बनी रहती है। इसके बावजूद फुटपाथों पर तेजी से बढ़ रहे अतिक्रमण के कारण व्यवस्था चरमराती नजर आ रही है।
बताया जा रहा है कि सड़क किनारे और फुटपाथ पर बड़ी संख्या में ठेले और छोटी-छोटी दुकानें लगाई जा रही हैं। इन दुकानों के कारण फुटपाथ लगभग पूरी तरह घिर गए हैं, जिससे पैदल यात्रियों को मजबूरन सड़क पर चलना पड़ रहा है। इससे दुर्घटना की आशंका भी बढ़ रही है। खासकर कार्यालय समय में जब यातायात अधिक रहता है, तब स्थिति और अधिक अव्यवस्थित हो जाती है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार फुटपाथों का निर्माण पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए किया गया था, लेकिन लगातार हो रहे अतिक्रमण के कारण उनका उपयोग ही समाप्त हो गया है। लोगों का कहना है कि इस मार्ग से रोजाना सरकारी कर्मचारी, विद्यार्थी और अन्य नागरिक गुजरते हैं, लेकिन उन्हें सुरक्षित रूप से चलने की जगह नहीं मिल पाती।
क्षेत्र में रहने वाले लोगों ने बताया कि कई बार प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया गया है, लेकिन अभी तक स्थायी रूप से कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कभी-कभी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जरूर की जाती है, लेकिन कुछ ही दिनों बाद फिर से ठेले और दुकानें लग जाती हैं।
नागरिकों का कहना है कि यह इलाका शहर के प्रमुख प्रशासनिक केंद्रों में से एक है और इसे शहर का वीआईपी कॉरिडोर भी माना जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में यदि फुटपाथों पर इस तरह अतिक्रमण होता रहेगा तो इससे शहर की व्यवस्था और छवि दोनों प्रभावित होंगी।
लोगों ने नगर निगम और प्रशासन से मांग की है कि फुटपाथों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और नियमित रूप से निगरानी की जाए, ताकि दोबारा अवैध दुकानें और ठेले न लग सकें। साथ ही यह भी कहा गया है कि जरूरतमंद ठेला संचालकों के लिए वैकल्पिक स्थान तय किया जाए, जिससे उनकी रोजी-रोटी भी प्रभावित न हो और आम लोगों को भी परेशानी न झेलनी पड़े।

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