गोविंदपुरा विधानसभा के नरेलाशंकरी में जर्जर हुए बिजली पोल

गोविंदपुरा विधानसभा के नरेलाशंकरी में जर्जर हुए बिजली पोल
– बिजली कंपनी नहीं दे रही ध्यान, कभी भी हो सकती है घटना
भोपाल यशभारत। राजधानी के गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र के नरेला शंकरी वार्ड ६५ के इलाके में इन दिनों लोग बिजली के खतरनाक पोलों के साए में जीने को मजबूर हैं। क्षेत्र में जगह-जगह लगे बिजली के पोल जंग खाकर कमजोर हो चुके हैं, कई के निचले हिस्से पूरी तरह सड़ चुके हैं। स्थिति यह है कि हल्की आंधी या बारिश में ये पोल कभी भी गिर सकते हैं, जिससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी हुई है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उन्होंने कई बार इस संबंध में बिजली वितरण कंपनी और नगर निगम अधिकारियों को शिकायत दी है, लेकिन अब तक किसी ने मौके पर आकर स्थिति का जायजा तक नहीं लिया। विभाग की यह लापरवाही अब जन सुरक्षा के लिए खतरा बन चुकी है।
पोल झुके, तार लटक रहे
नरेला शंकरी के मुख्य मार्ग से लेकर अंदरूनी गलियों तक कई स्थानों पर बिजली के पोल झुक चुके हैं। कुछ पोल तो इतने नीचे आ गए हैं कि बिजली के तार घरों की बालकनियों और दुकानों की छतों को छूते नजर आते हैं। स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि बरसात के समय कई बार खंभों में करंट दौड़ जाता है। बच्चों को बाहर खेलने से रोकना पड़ता है। दो महीने पहले एक पोल गिरते-गिरते बचा था, लेकिन विभाग ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की।
जंग ने कर दिया पोल खोखला
क्षेत्र के रहवासी अमित बंसल बताते हैं कि नरेला शंकरि कॉलोनी में करीब दो दशक पहले लगाए गए बिजली के पोल अब जंग लगने से पूरी तरह कमजोर हो चुके हैं। कई पोलों के निचले हिस्से से मिट्टी हट चुकी है और उनमें बड़े-बड़े छेद हो गए हैं। अगर समय रहते इनकी मरम्मत या बदलाव नहीं हुआ, तो यह किसी को भी हताहत कर सकते हैं।
बिजली कंपनी की चुप्पी
स्थानीय नागरिकों की शिकायत है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारी न तो पोलों की जांच कर रहे हैं और न ही नए पोल लगाने की कोई योजना बना रहे हैं। कंपनी की हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करने पर सिर्फ जांच जारी है का जवाब मिलता है, लेकिन हकीकत में कोई सुधार नजर नहीं आता। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इस मामले को लेकर वे विभागीय अधिकारियों से चर्चा कर चुके हैं।
कभी भी हो सकता है हादसा
लोगों का कहना है कि जंग लगे पोलों के गिरने से न केवल जानमाल का नुकसान हो सकता है, बल्कि करंट लगने और शॉर्ट सर्किट की घटनाओं का भी खतरा बढ़ जाता है। बरसात या आंधी के मौसम में यह स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। नरेला शंकरी के जर्जर बिजली पोल प्रशासनिक लापरवाही की एक स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं। बिजली कंपनी की अनदेखी और समय पर रखरखाव की कमी से स्थानीय लोग हर दिन खतरे के बीच जी रहे हैं। नागरिकों की मांग है कि विभाग जल्द कार्रवाई कर पुराने पोल बदलवाए, ताकि किसी भी संभावित दुर्घटना से पहले सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। अन्यथा एक छोटा हादसा कभी भी बड़ी त्रासदी का रूप ले सकता है।







