सांदीपनि विद्यालयों में प्रवेश नीति में बदलाव: नए भवन वाले स्कूलों को प्राथमिकता, कम नामांकन वाले सरकारी स्कूल होंगे मर्ज

जबलपुर: स्कूल शिक्षा विभाग ने सांदीपनि विद्यालयों में सत्र 2025-26 के लिए प्रवेश नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब जिन सांदीपनि विद्यालयों के नए भवन बनकर तैयार हो जाएंगे और स्कूल शिक्षा विभाग को हस्तांतरित कर दिए जाएंगे, उनमें नई संशोधित नीति के अनुसार प्रवेश प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य इन आधुनिक विद्यालयों में ‘आकांक्षी नामांकन’ (Aspirational Enrolment) प्राप्त करना और कम नामांकन वाले सरकारी स्कूलों के छात्रों को बेहतर सुविधाएं प्रदान करना है।
जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी की भूमिका अहम
संशोधित नीति के अनुसार, सांदीपनि विद्यालयों के लिए गठित जिला स्तरीय मॉनिटरिंग कमेटी के मार्गदर्शन और नियंत्रण में ही प्रवेश प्रक्रिया संचालित की जाएगी। यह कमेटी प्रत्येक विद्यालय के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना बनाएगी और प्रस्तुत प्रवेश नीति के अनुरूप निर्णय लेकर उसका क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगी।
आस-पास के सरकारी स्कूलों के छात्रों को मिलेगा प्रवेश
नए भवन वाले सांदीपनि विद्यालयों में उनके मॉडल के अनुसार आकांक्षी नामांकन के आधार पर आस-पास के शासकीय विद्यालयों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाएगा। इन सांदीपनि विद्यालयों को केंद्र मानकर, क्रमशः 1 किलोमीटर, 2 किलोमीटर, और 3 किलोमीटर की परिधि में स्थित सरकारी स्कूलों के छात्रों को प्राथमिकता से प्रवेश दिया जाएगा।
कम नामांकन वाले स्कूलों को प्राथमिकता और युक्तियुक्तकरण
इस नीति में विशेष रूप से कम नामांकन वाले शासकीय विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे विद्यालयों के सभी विद्यार्थियों को सांदीपनि विद्यालयों में प्रवेश दिलाया जाएगा और उन सरकारी स्कूलों में नए प्रवेश नहीं दिए जाएंगे।
जब किसी सरकारी विद्यालय के सभी विद्यार्थी सांदीपनि विद्यालय में प्रवेश ले लेंगे, तो उस विद्यालय को अन्य आवश्यकता वाले स्थानों के लिए ‘युक्तियुक्तकरण’ (Rationalization) किया जाएगा। इसका अर्थ है कि उसके भवन और संसाधनों का उपयोग किसी अन्य शैक्षणिक या विभागीय कार्य के लिए किया जा सकेगा। ऐसे विद्यालयों के भवन और भूमि के उपयोग के संबंध में जिला स्तरीय मॉनिटरिंग समिति युक्तियुक्त अनुशंसा के साथ अपना प्रस्ताव अंतिम निर्णय के लिए आयुक्त, लोक शिक्षण को प्रस्तुत करेगी।
निजी स्कूलों के छात्रों को भी मौका
यदि नए भवन में स्थानांतरित होने वाले सांदीपनि विद्यालयों में आकांक्षी नामांकन की पूर्ति नहीं हो पाती है, तो अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत निजी विद्यालयों से कक्षा 8वीं उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थियों को भी कक्षा 9वीं में प्रवेश दिया जा सकेगा।
क्रियान्वयन और नीतिगत प्रश्नों पर निर्णय
क्रियान्वयन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी परिस्थिति पर जिला स्तरीय मॉनिटरिंग समिति निर्णय लेगी। यदि क्रियान्वयन में कोई नीतिगत प्रश्न उठता है, तो समिति अपने अभिमत सहित प्रस्ताव आयुक्त, लोक शिक्षण को प्रेषित करेगी।
भवन हस्तांतरण की प्रक्रिया
निर्माण एजेंसियों द्वारा सांदीपनि विद्यालयों के भवन का निर्माण कार्य पूर्ण होने पर उन्हें स्कूल शिक्षा विभाग को हस्तांतरित किया जाएगा। निर्माण कार्य पूर्ण होने वाले विद्यालयों की सूची संबंधित जिला कलेक्टर को लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा भेजी जाएगी।
यह नई नीति सांदीपनि विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त कर अधिक से अधिक छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, साथ ही यह शिक्षा विभाग को अपने संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करने में भी सहायक होगी।







