जनजाति जीवन उत्सव में सजी विरासत और परंपराओं की रंगारंग झलक
आकाश पांडेय की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट

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जबलपुर। भगवान बिरसा मुंडा जयंती के अवसर पर शहर में आयोजित जनजाति जीवन उत्सव में आदिवासी समाज की बहुरंगी संस्कृति, विरासत और परंपराओं की ऐसी झलक देखने को मिली, जिसने शहरवासियों का मन मोह लिया। कार्यक्रम में विभिन्न जनजातियों-भील, महादेव, कोरकू, सहरिया, बैगा, भारिया सहित अन्य समुदायों ने अपनी अनूठी पहचान, परिधान, कला और इतिहास को गर्व के साथ प्रस्तुत किया।
राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने प्रदर्शनियों का अवलोकन किया और कलाकारों से संवाद कर उनकी संस्कृति और परंपराओं की बारीकियों को जाना। हर स्टॉल पर कला, इतिहास और परंपरा जीवंत दिखाई दी-कहीं आदिवासी नृत्य की गूंज, कहीं हस्तशिल्प की कला, तो कहीं वीर नायकों की गाथाएं। रानी दुर्गावती, बिरसा मुंडा और अन्य जनजातीय नायकों के चित्र, पेंटिंग और दस्तावेज लोगों के आकर्षण का केंद्र बने। उत्सव स्थल पर मौजूद रहकर ग्राउंड पीस की रिकॉर्डिंग के दौरान हर जनजाति ने अपनी विशेषताओं, जीवनशैली और पारंपरिक वेशभूषा के बारे में | विस्तार से बताया।
भील जनजाति ने तीर-कमान, पारंपरिक लोकगीत और युद्ध-कौशल की पहचान को प्रमुखता दी। महादेव (कौड़िया) जनजाति ने अपनी धार्मिक परंपराओं और पर्वो की झलक पेश की कोरकू जनजाति ने कृषि आधारित जीवनशैली, जड़ी-बूटियों के ज्ञान और उनके पर्वों का परिचय दिया। सहरिया जनजाति ने अपनी विशिष्ट लोक वेशभूषा और लकड़ी की नक्काशी वाली कला के बारे में बताया।
जनजातियों ने किया अपनी कलाकृतियों का प्रदर्शन
पारंपरिक चिकित्सा और नृत्य शैली से लोगों को प्रभावित किया। भारिया जनजाति ने अपने पारंपरिक हथकड़ों, संगीत और सामुदायिक जीवन की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। हर जनजाति ने अपनी वेशभूषा के महत्व, रंगों के प्रतीक अर्थ और अपने इतिहास से जुड़े गौरव को साझा किया। स्थल पर उमड़े हजारों लोगों ने न केवल प्रदर्शनियों का आनंद लिया, बल्कि कलाकारों से बातचीत कर उनकी संस्कृति को करीब से समझा।







