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पुलिसकर्मी अब सोशल मीडिया पर नहीं कर सकेंगे सरकारी नीतियों पर टिप्पणी व्यक्तिगत अकाउंट पर भी लागू होंगे नियम 

रिपोर्टर (आकाश पाण्डेय ) जबलपुर, यश भारत। मध्य प्रदेश पुलिस कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर नई सोशल मीडिया पॉलिसी-2026 जारी की गई है। इसके तहत पुलिसकर्मियों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सरकारी नीतियों, योजनाओं और विभागीय मामलों पर व्यक्तिगत राय व्यक्त करने से बचना होगा। नियम व्यक्तिगत सोशल मीडिया अकाउंट पर भी लागू होंगे। दिशा-निर्देशों का उद्देश्य सोशल मीडिया के जरिए गलत, अपुष्ट या संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक होने से रोकना और विभाग की गोपनीयता एवं विश्वसनीयता बनाए रखना है।

जांच और गिरफ्तारी की जानकारी पोस्ट करने में भी सावधानी

नई गाइडलाइन में गिरफ्तारी, छापे और आपराधिक जांच से संबंधित जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करने में अधिकतम सावधानी बरतने को कहा गया है। ऐसे मामलों में केवल आवश्यक और तथ्यात्मक जानकारी ही अधिकृत माध्यम से साझा की जाएगी। कानून-व्यवस्था, आपराधिक जांच और पुलिस की उपलब्धियों से जुड़ी जानकारी मीडिया को देने का अधिकार केवल नामित अधिकारियों को होगा।

संवेदनशील ड्यूटी वाले पुलिसकर्मियों पर विशेष पाबंदी

संवेदनशील ड्यूटी में तैनात कर्मचारी अपने काम की सटीक प्रकृति, कार्यस्थल या संबंधित गतिविधियों की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा नहीं कर सकेंगे। ऐसे कर्मचारियों को लोकेशन और जियो-टैगिंग सुविधा बंद रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। वर्गीकृत या संवेदनशील जानकारी इंटरनेट पर पोस्ट करने पर पूरी तरह रोक रहेगी।

वर्दी और सरकारी संसाधनों के निजी प्रचार पर भी रोक

पुलिसकर्मी सोशल मीडिया पर सरकारी वाहनों, कार्यालय, आवास, वर्दी या अन्य सरकारी संसाधनों को अपनी व्यक्तिगत छवि बनाने के लिए प्रदर्शित करने से बचेंगे। सरकारी लोगो, प्रतीक और वर्दी का इस्तेमाल व्यक्तिगत पोस्ट में नहीं किया जा सकेगा। साथ ही किसी अधिकारी के व्यक्तिगत प्रचार या महिमामंडन के लिए मीडिया ब्रीफिंग या सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल से भी बचने के निर्देश हैं।

पोस्ट की जिम्मेदारी खुद कर्मचारी की

गाइडलाइन के मुताबिक ब्लॉग, सोशल मीडिया या किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर कर्मचारी द्वारा डाली गई सामग्री की व्यक्तिगत जिम्मेदारी संबंधित कर्मचारी की होगी। कर्मचारियों को यह भी ध्यान रखना होगा कि इंटरनेट पर पोस्ट की गई सामग्री पूरी तरह हटाना हमेशा संभव नहीं होता। विभागीय नियमों के उल्लंघन को गंभीरता से लेते हुए उपयुक्त कार्रवाई की जा सकती है।

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