भोपाल में 1.5 करोड़ की नशीली कफ सिरप मामला, पुलिस को चकमा देने के लिए मासूम बच्चों से बदलवाते थे बोतलों के रैपर

भोपाल में 1.5 करोड़ की नशीली कफ सिरप मामला, पुलिस को चकमा देने के लिए मासूम बच्चों से बदलवाते थे बोतलों के रैपर
कॉरपोरेट स्टाइल में चल रहा था थ्री-लेयर नेटवर्क
भोपाल, यशभारत। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नशे के काले कारोबार के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। एसटीएफ की टीम ने गांधीनगर इलाके की डोबरा पटेल सिटी कॉलोनी में स्थित एक ठिकाने पर आधी रात को छापा मारकर भारी मात्रा में नशीला कफ सिरप बरामद किया है। बरामद की गई करीब 75 हजार बोतलों की बाजार में अनुमानित कीमत डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक आंकी गई है। पुलिस ने इस पूरे सिंडिकेट के मास्टरमाइंड अकील खान समेत 10 आरोपियों को रंगे हाथों दबोच लिया है। इस गिरोह का सबसे घिनौना चेहरा तब सामने आया जब पकड़े गए आरोपियों में 3 नाबालिग बच्चे भी शामिल मिले।

3 स्तरों में बंटा था काम, हर टीम की थी अलग जिम्मेदारी
एसटीएफ के डीआईजी राहुल लोढ़ा ने इस नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए बताया कि आरोपी किसी बड़ी कंपनी की तरह ‘थ्री-लेयर’ सिक्योरिटी सिस्टम के तहत काम बांटकर इस अवैध धंधे को ऑपरेट कर रहे थे:
पहली लेयर (लॉजिस्टिक्स और सप्लाई): इस टॉप लेयर को मुख्य सरगना अकील खान खुद संभाल रहा था। वह अपने तीन खास गुर्गों के साथ मिलकर बड़ी गाड़ियों और लोडिंग वाहनों के जरिए नशे की इस खेप को भोपाल शहर और आसपास के देहाती इलाकों में सप्लाई करवाता था।
दूसरी लेयर (वेयरहाउसिंग और स्टॉक): इस टीम में शामिल चार आरोपियों का काम कफ सिरप के स्टॉक को सुरक्षित रखना था। पुलिस और प्रशासन की नजरों से बचने के लिए ये लोग लगातार अपने ठिकाने और मोबाइल लोकेशन बदलते रहते थे।
तीसरी लेयर (री-ब्रांडिंग और पैकेजिंग): इस स्तर पर गिरोह ने मासूमों को ढाल बनाया था। पकड़े गए तीन नाबालिग बच्चों से सिरप की बोतलों के असली रैपर हटवाकर दूसरे फर्जी रैपर चिपकवाए जाते थे, ताकि बाजार में सप्लाई के दौरान किसी को शक न हो।

गांधीनगर और मुबारकपुर बने थे नशे के लोडिंग हब
शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने गांधीनगर की डोबरा पटेल सिटी कॉलोनी और मुबारकपुर क्षेत्र को अपना मुख्य बेस बना रखा था। यहीं से पूरे भोपाल और नजदीकी जिलों में नशे के सौदागरों को माल री-डिस्ट्रीब्यूट होता था। एसटीएफ की एक टीम अब मुबारकपुर इलाके में भी सघन सर्च ऑपरेशन चला रही है, क्योंकि वहां भी भारी मात्रा में स्टॉक छिपाकर रखे जाने की आशंका है। जब्त दवाओं के सैंपल को जांच के लिए लैब भेज दिया गया है।
बिना पुलिस वेरिफिकेशन मकान देने वाला मालिक भी फंसेगा
नशे का यह पूरा खेल जयदीप सिंह नामक व्यक्ति के मकान से संचालित हो रहा था। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि मकान किराए पर देते समय नियमों का पूरी तरह उल्लंघन किया गया और कोई उचित पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया गया। इसके चलते मकान मालिक जयदीप और उन्हें यह ठिकाना दिलाने वाले आकाश भाटिया को भी एसटीएफ ने अपनी रडार पर ले लिया है।
दो मुख्य तस्कर अभी भी फरार, धरपकड़ के लिए टीमें मुस्तैद
एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक, यह नेटवर्क सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं है बल्कि इसके तार पूरे प्रदेश से जुड़े हो सकते हैं। मामले में शामिल दो अन्य मुख्य आरोपी फिलहाल फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ की दो विशेष टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर इस नेटवर्क के मुख्य सप्लायरों का भी पर्दाफाश कर दिया जाएगा।







