भोपाल

बदलते परिवेश में कार्बन खेती जरुरी: अधिकारी -स्वैच्छिक कार्बन मानक पर राष्ट्रीय कार्यशाला

बदलते परिवेश में कार्बन खेती जरुरी: अधिकारी

-स्वैच्छिक कार्बन मानक पर राष्ट्रीय कार्यशाला

भोपाल, यशभारत। जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए कृषि क्षेत्र में कार्बन अनुक्रमण और सतत कृषि जरुरी है। यह विचार प्रमुख वैज्ञानिक तपन अधिकारी ने अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण और विकास संस्थान के सहयोग से स्वैच्छिक कार्बन मानक पर एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कार्बन खेती के जरिये न केवल ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम किया जा सकता है, बल्कि किसानों की आजीविका भी बेहतर बनाई जा सकती है। दरअसल, इस कार्यशाला का उद्देश्य जलवायु-स्मार्ट खेती को बढ़ावा देना और किसानों को स्वैच्छिक कार्बन बाजार से जोड़कर उनकी आमदनी में वृद्धि के अवसर प्रदान करना था। कार्यशाला में आईसीएआर-आईआई एसएस द्वारा बोरखेड़ी गांव में 150 एकड़ क्षेत्र में संचालित पायलट परियोजना मध्य भारत के लिए स्थायी कृषि प्रथाओं के माध्यम से मृदा कार्बन अनुक्रम और जीएचजी में कमी की जानकारी साझा की गई। परियोजना का नेतृत्व डॉ. संगीता लेंका कर रही हैं, जिसका उद्देश्य खेत स्तर पर कार्बन क्रेडिट की व्यवहार्यता को दर्शाना है। इस दौरान जलवायु-स्मार्ट कृषि तकनीकों पर परिचर्चा के दौरान संरक्षण कृषि, फसल अवशेष प्रबंधन, ड्रिप-स्प्रिंकलर सिंचाई, जैविक खेती, कृषि वानिकी, और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर चर्चा की गई। इसी तरह से डॉ. प्रमोद झा ने कार्बन क्रेडिट प्राप्ति की चरणबद्ध प्रक्रिया की जानकारी द ी, जिसमें नामांकन, डेटा संग्रह, एमआरवी प्रणाली, और क्रेडिट जारी करना शामिल है। इसी तरह से प्रायोगिक प्रशिक्षण के दौरान डॉ. मीना, डॉ. धीरज कुमार और डॉ. राहुल मिश्रा ने वर्मी कम्पोस्टिंग और मृदा नमूना संग्रह पर जानकारी दी। इस कार्यशाला में बोरखेड़ी गांव की 20 महिला किसानों सहित लगभग 50 किसानों ने भाग लिया।

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