4 महीने का फिंगरप्रिंट लेकर दो माह का दिया राशन, ग्रामीणों ने राशन दुकान के सेल्समैन पर लगाए आरोप, कलेक्टर से शिकायत, कार्रवाई की मांग

कटनी, यशभारत। जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा के अंतर्गत ग्राम पंचायत बिचुआ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन वितरण को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि राशन दुकान में करीब 600 राशन कार्डधारकों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों ने राशन दुकान के सेल्समैन पर राशन वितरण में अनियमितता किए जाने के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि कई राशन कार्डधारकों से ई-पास मशीन पर 4 माह के राशन के लिए फिंगरप्रिंट लगवाए जाते हैं, लेकिन उन्हें कथित तौर पर केवल दो माह का खाद्यान्न ही दिया जाता है। ग्रामीणों के अनुसार यह स्थिति किसी एक दो कार्डधारकों तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से कई उपभोक्ताओं को इस परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि यदि ई-पास मशीन में संबंधित कार्डधारक के नाम पर कई महीनों का राशन दर्ज हो रहा है तो उसके अनुसार खाद्यान्न का वास्तविक वितरण क्यों नहीं किया जा रहा है। उनका कहना है कि पूरे मामले की जांच ई पॉस मशीन के रिकॉर्ड और राशन दुकान के स्टॉक रजिस्टर के मिलान से की जा सकती है। ग्रामीणों के मुताबिक ग्राम पंचायत बिचुआ के अंतर्गत करीब पांच गांवों के उपभोक्ता राशन दुकान से खाद्यान्न प्राप्त करते हैं। आरोप है कि इनमें से कुछ गांवों के लोगों को राशन वितरण में लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि राशन मांगने पर कई बार खाद्यान्न उपलब्ध नहीं होने या ऊपर से राशन नहीं आने की बात कही जाती है ।
इस स्थिति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। उनका कहना है कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न उपलब्ध कराना है, इसलिए वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बेहद जरूरी है ।
शिकायत करने पर नाम काटने की धमकी
कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि राशन वितरण में कमी को लेकर सवाल करने या शिकायत करने पर उन्हें राशन कार्ड से नाम काटने की धमकी दी जाती है । ग्रामीणों के अनुसार इस कारण कई उपभोक्ता अपनी शिकायत खुलकर सामने रखने से भी डरते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मजदूरी कर परिवार चलाने वाले लोगों के लिए सरकारी राशन महत्वपूर्ण सहारा है। ऐसे में यदि उन्हें निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न नहीं मिलता है तो आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की परेशानी और बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं खाद्य विभाग से बिचुआ राशन दुकान की विस्तृत जांच कराने की मांग की है। उन्होंने पिछले कई महीनों के खाद्यान्न आवंटन, ई पॉस मशीन में दर्ज वितरण, उपभोक्ताओं के फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और दुकान में उपलब्ध वास्तविक खाद्यान्न का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि रिकॉर्ड और मौके पर उपलब्ध स्टॉक का मिलान होने से यह स्पष्ट हो सकता है कि आवंटित खाद्यान्न की तुलना में कितना वितरण किया गया और किसी प्रकार की कमी है या नहीं।






