8 करोड़ का बीमा घोटाला: EOW ने किया बड़े गिरोह का भंडाफोड़, सरपंच-सचिव सहित एजेंटों पर FIR

भोपाल: मध्य प्रदेश के आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के साथ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने वाले एक अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। इस घोटाले में बीमा एजेंटों, पॉलिसी धारकों और नॉमिनी के साथ-साथ सरकारी तंत्र के लोकसेवक (सरपंच और सचिव) भी शामिल पाए गए हैं। ई.ओ.डब्ल्यू. ने लगभग 8 करोड़ रुपये की अवैध क्लेम राशि हड़पने के प्रयास में दर्जनों लोगों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया है।
षड्यंत्र का तरीका: ‘मुर्दों’ का बीमा और फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने बेहद शातिर तरीके से इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया। मुख्य रूप से दो तरीकों से कंपनी को चूना लगाने की कोशिश की गई:
गंभीर बीमारी छुपाना: कई पॉलिसियों में एजेंटों और धारकों ने गंभीर बीमारियों की जानकारी छुपाकर बीमा कराया।
मृत व्यक्तियों का बीमा: सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि 18 मामलों में जो व्यक्ति पहले ही मर चुके थे, उन्हें जीवित दिखाकर उनके नाम पर पॉलिसियां ली गईं। इसके बाद लोकसेवकों की मिलीभगत से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर क्लेम राशि हड़पने की कोशिश की गई।
इन पर गिरी गाज: आरोपी और पद
ई.ओ.डब्ल्यू. ने जांच के बाद निम्नलिखित श्रेणियों में आरोपियों को नामजद किया है:
लोकसेवक: ग्राम आलाखेड़ा (महिदपुर) के सरपंच जसवंत सिंह, सचिव राजकुमार देवड़ा, सहायक सचिव राधेश्याम गुर्जर; ग्राम पंचायत पालखंदा के सचिव मेम्बर चौधरी और ग्राम पंचायत थुरेरी के सचिव लाखन सिंह चौहान। इन पर पद का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप है।
बीमा एजेंट: मेघा डोंगरेकर, ऋषि पाल, यशोदाबेन शर्मा, मुकेश साधवानी सहित करीब 13 एजेंटों के नाम प्राथमिकी में शामिल हैं।
नॉमिनी: क्लेम राशि प्राप्त करने की फिराक में लगे 22 से अधिक नॉमिनी (वारिसदार) भी आरोपी बनाए गए हैं।
जांच में हुआ खुलासा
शिकायत क्रमांक 595/2025 की विस्तृत जांच में ई.ओ.डब्ल्यू. उज्जैन इकाई ने पाया कि कुल 27 संदिग्ध पॉलिसियों में से 19 में गंभीर तथ्य छुपाए गए थे। आरोपियों ने कूट रचित (फर्जी) दस्तावेज तैयार कर बीमा कंपनी को गंभीर आर्थिक क्षति पहुंचाने का आपराधिक षड्यंत्र रचा था।
दर्ज धाराएं
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ मुख्यालय भोपाल ने आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दण्ड संहिता (IPC) की धारा 417, 420/511, 467, 468, 471, 120 (बी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल मामले की विस्तृत विवेचना जारी है, जिसमें कई और बड़े नामों के खुलासे की उम्मीद है।







