भोपालमध्य प्रदेश

कबाड़ बनीं दर्जनों एंबुलेंस का किया जाएगा स्क्रेप

कबाड़ बनीं दर्जनों एंबुलेंस का किया जाएगा स्क्रेप
– यशभारत की खबर के बाद हरकत में आया स्वास्थ्य अमला
भोपाल यशभारत। राजधानी भोपाल में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का ताजा उदाहरण पुराने 108 एंबुलेंस कार्यालय के बाहर देखने को मिल रहा है। कभी जीवनदायिनी कहलाने वाली 108 एंबुलेंसें अब कबाड़ में तब्दील हो चुकी हैं। इन पर अब भी सरकारी सीरीज के नंबर और शासकीय मोहर स्पष्ट रूप से अंकित हैं। इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक हल्कों और स्वास्थ्य विभाग में हडक़ंप मचा हुआ है। यशभारत में खबर के प्रकाशन के बाद सीएमएचओ मनीष शर्मा ने संबंधितों से जवाब तलब करने की बात कही है।
खड़े खड़े ही कबाड़ कर दी गईं एंबुलेंस
सूत्रों के मुताबिक, परिसर में कई एंबुलेंसें वर्षों से खड़ी-खड़ी सड़ रही हैं। जिन गाडय़िों ने कभी हजारों मरीजों की जान बचाई, आज वे जंग खा रही हैं। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में एंबुलेंस एक साथ कबाड़ कैसे हो गईं? नियम के अनुसार, किसी भी सरकारी वाहन को अनुपयोगी घोषित करने के बाद उसकी नीलामी प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विभागीय लापरवाही के चलते ये वाहन खुले मैदान में यूं ही पड़े-पड़े सरकारी संपत्ति की दुर्दशा बयां कर रहे हैं।
कचरे के ढेर में खड़े वाहन मलबे में दबे
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि लंबे समय से यहां खड़ी इन एंबुलेंस से बदबू और गंदगी फैल रही है। कई वाहन बिना किसी निगरानी के खुले में खड़े हैं, जिनसे अब मच्छरों और कीड़ों का प्रकोप बढ़ रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में सरकारी वाहनों की जिम्मेदारी किसकी है और क्या इनके रखरखाव या नीलामी को लेकर किसी ने कभी रिपोर्ट तैयार की?
नियमानुसार नीलामी की प्रक्रिया की जानी थी
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच शुरू करने की बात कही है। एक अधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि नियमानुसार इन वाहनों के उपयोग की अवधि पूरी होने के बाद नीलामी की प्रक्रिया की जानी थी, लेकिन किस कारण से यह प्रक्रिया नहीं हुई इसका जवाब आला अधिकारी ही दे सकेंगे। अब इस संबंध में रिपोर्ट तलब की जा रही है।
उपयोग में लाए जा सकते थे वाहन
वहीं, सूत्र यह भी बताते हैं कि कुछ एंबुलेंसें मामूली मरम्मत से फिर से उपयोग में लाई जा सकती थीं, लेकिन समय पर ध्यान न देने के कारण वे भी पूरी तरह बेकार हो गईं। यह स्थिति न केवल सरकारी संसाधनों की बर्बादी को दिखाती है, बल्कि जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। लोगों के जहन में सवाल यह उठ रहा है कि जनता की सेवा के लिए खरीदी गई करोड़ों की ये एंबुलेंसें आखिर जवाबदेही के अभाव में कब तक यूं ही कबाड़ बनकर पड़ी रहेंगी?
एंबुलेंस का स्क्रेप कया जाएगा
पुराने 108 कार्यालय के पास खड़ी सभी एंबुलेंस का स्क्रेप किया जाएगा। ये वाहन कबाड़ कैसे हुए हैं इस संबंध में जानकारी संबंधित अधिकारियों से ली जा रही है। जल्द ही नोटिस भी जारी कर जवाब तलब किए जाएंगे।
– मनीष शर्मा, सीएमएचओ, भोपाल

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