शांति बनाए रखने की शर्त पर दिपके, दास और रांका रिहा

नई दिल्ली, एजेंसी। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के तीन प्रमुख नेताओं अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को मजिस्ट्रेट ने शर्तों के साथ रिहा कर दिया। कॉकरोच जनता पार्टी ने आज रविवार को फिर से जंतर-मंतर पर बड़े प्रोटेस्ट का एलान किया है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर सुरक्षा कड़ी कर दी है। दिल्ली पुलिस ने तीनों को दिल्ली कैंट थाने में विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया था। पेशी के दौरान उनसे बॉन्ड भरवाया गया और एक साल तक शांति भंग नहीं करने की शर्त पर रिहाई दी गई। तीनों नेताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई थी। पुलिस ने उन्हें एहतियातन हिरासत में लिया था। कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें रिहा करने का आदेश दिया गया।
इंटरनेट सेवा की जाए बहाल
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को अवमानना का नोटिस जारी किया है। साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि दिल्ली में आवाजाही और इंटरनेट सेवा सामान्य की जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोगों को अपने पेशे से जुड़े काम करने से न रोका जाए। दिल्ली में लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल (स्त्र) से कहा कि लोगों को अपने पेशे से जुड़े काम करने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मेट्रो को सामान्य समय-सारणी के अनुसार चलाया जाए।
सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश हटाए जाएं सारे बैरिकेड
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने 45 मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने से संबंधित अवमानना याचिका और हिरासत में लिए गए लोगों के मामले में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के लिए कार्यवाही शुरू की। पीठ इन दोनों मामलों पर सुनवाई हुई। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के जरिए हिरासत में लिए गए लोगों के संबंध में अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई है। वहीं, 45 मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने से जुड़ी अवमानना याचिका पर भी सुनवाई हुई।
जगह-जगह लगाए गए बैरिकेड हटाए जाएं
हालांकि, कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए जरूरत पडऩे पर नियम लागू किए जा सकते हैं। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 19(2) का भी जिक्र किया है। कोर्ट ने शहर में इंटरनेट सेवा को सामान्य रूप से बहाल करने को कहा। साथ ही, निर्देश दिया कि दिल्ली में जगह-जगह लगाए गए बैरिकेड हटाए जाएं। बैरिकेड केवल वहीं रखे जाएं, जहां उनकी जरूरत हो। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि लोगों की आवाजाही सामान्य की जाए। हालांकि, कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरत के मुताबिक उचित पाबंदियां लगाई जा सकती हैं। वहीं, अब इस मामले के सुनवाई मंगलवार को होगी।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर कोर्ट की अहम टिप्पणी
दिल्ली पुलिस पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर पुलिस को कोई स्वतंत्र अधिकार नहीं मिल जाता कि वह राज्य की दलीलों से अलग अपना पक्ष रखे। अगर किसी पुलिस अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से नुकसान पहुंचा है, तो वह अलग से अदालत का रुख कर सकता है। अदालत के लिए यह मायने नहीं रखता कि पीडि़त कौन है? नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रता की रक्षा करना अदालत की समान जिम्मेदारी है। पुलिसकर्मी हो, वकील हो या आम नागरिक, हर व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करना अदालत का समान कर्तव्य है।
सुनवाई के शुरुआत में जस्टिस बागची ने कहा कि एक असाधारण स्थिति में हम यहां बैठे हैं। हमारे सामने 2 याचिकाएं हैं, लेकिन हम जानते हैं कि बहुत से वकील बोलना चाहते हैं। हम सबको अवसर देंगे। केके वेणुगोपाल ऑनलाइन जुड़े दिख रहे हैं। हम उन्हें सबसे पहले सुनेंगें। वेणुगोपाल ने कहा कि मैं केस नंबर … पेश हो रहा हूं। इस पर जज ने कहा कि आप कंटेम्प्ट की मांग कर रहे हैं। ऐसी याचिका और भी हैं। हमारा प्रस्ताव है कि उन्हें सोमवार को सुना जाए। नोटिस से पहले हम सॉलिसिटर जनरल को सुनेंगे। सुनवाई के दौरान वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अवमानना के अलावा भी बातें हैं।






