मध्य प्रदेशराज्य

यश भारत ख़बर का असर: झुका विश्वविद्यालय प्रशासन, आदेश वापस

सागर यश भारत (संभागीय ब्यूरो)/ डॉ. हरीसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय, सागर के योग विभाग के अस्तित्व को बचाने के लिए बीते आठ दिनों से चल रहा छात्रों का महासंग्राम आखिरकार जीत की दहलीज पर समाप्त हुआ। भीषण गर्मी और तेज धूप के थपेड़ों के बीच छात्र छात्राओं के शांतिपूर्ण आंदोलन, क्रमिक भूख हड़ताल और इस मुद्दे को ‘यश भारत’ द्वारा प्रमुखता से उठाए जाने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को अपना विवादित फैसला बदलना पड़ा। विश्वविद्यालय ने योग विभाग को जर्जर भवन में स्थानांतरित करने के आदेश को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। इसे छात्रों के धैर्य और सत्य की बड़ी जीत माना जा रहा है।

आदेश वापस: विश्वविद्यालय प्रशासन का ‘यू-टर्न’

विश्वविद्यालय के कुलसचिव द्वारा जारी नए कार्यालयीन आदेश (क्रमांक/आर/2026/1135) में स्पष्ट किया गया है कि योग विभाग को ओल्ड कंप्यूटर साइंस भवन में स्थानांतरित करने संबंधी पूर्व आदेश को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाता है। गौरतलब है कि प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ छात्र छात्राएं पिछले 8 दिनों से स्वर्ण जयंती सभागार के सामने डटे हुए थे।

जब विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की मांगों के प्रति कथित तौर पर असंवेदनशील बना हुआ था, तब ‘यश भारत’ ने छात्रों की भूख हड़ताल और जर्जर भवन की हकीकत को प्रमुखता से प्रकाशित किया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने ‘सद्बुद्धि यज्ञ’ और ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ कर अपनी आवाज बुलंद की थी। इस खबर के वायरल होने और जनभावनाओं के जुड़ने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई थी।

सांसद की सक्रियता और चौतरफा दबाव का परिणाम

छात्रों ने इस मामले में सागर सांसद डॉ. लता वानखेड़े से भी गुहार लगाई थी। सांसद द्वारा इस विषय को मंत्रालय स्तर पर ले जाने के आश्वासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के दबाव ने विश्वविद्यालय प्रशासन को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया। आज जैसे ही आदेश स्थगित होने की सूचना प्रदर्शन स्थल पर पहुँची, छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई।

इन ने लिखी जीत की इबारत

इस जीत में मित्रा, अंजलि, अर्पिता, देवेश, गोलू, रामावतार, प्रिंस, पूर्णिमा, अनु, नैंसी, योगिता, सृष्टि, बादल, आराधना, गौरव, अनिकेत, सृजल, संगीता और गोविंद गुरु सहित उन तमाम छात्र-छात्राओं का अहम योगदान रहा, जिन्होंने भीषण गर्मी, कड़कड़ाती धूप और भूख की परवाह किए बिना विभाग की अस्मिता के लिए संघर्ष किया।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button